उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भीषण गर्मी और पारे के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के साथ ही बिजली का संकट गहरा गया है। लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और पानी की किल्लत से परेशान जनता का सब्र आखिरकार टूट गया। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात लखनऊ के कई इलाकों में हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब सैकड़ों नागरिकों ने पावर हाउसों का घेराव कर दिया। इस दौरान बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक हुई और सड़क जाम कर प्रदर्शन किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने अब 150 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
रात भर बिजली गुल, सुबह सड़क पर उतरा गुस्सा
लखनऊ के तेलीबाग, मवैया, उतरेटिया और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में पिछले कई दिनों से बिजली की आंख-मिचौली जारी थी। बुधवार और गुरुवार की पूरी रात बिजली न आने के कारण लोग घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो गए। बिजली न होने से न केवल लोग सो पाए, बल्कि सुबह इलाकों में पानी का गंभीर संकट भी खड़ा हो गया।
इससे नाराज होकर गुरुवार की सुबह सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सड़कों पर उतर आए। गुस्साए लोगों ने रायबरेली रोड शहीद पथ के नीचे बैरियर लगाकर रास्ता पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया और जमकर नारेबाजी की। इस चक्काजाम के कारण रायबरेली रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और काफी देर तक यातायात पूरी तरह से बाधित रहा।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 150 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज
सड़क जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और रास्ता खोलने का प्रयास किया, लेकिन माहौल काफी गरमा चुका था।
इस पूरे मामले पर पीजीआई इंस्पेक्टर धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार सुबह अचानक बड़ी संख्या में लोगों ने रायबरेली रोड को जाम कर दिया था, जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। समझाने के बावजूद कुछ उपद्रवी तत्व पुलिसकर्मियों से उलझ गए और अभद्रता की। कानून व्यवस्था को हाथ में लेने और यातायात प्रभावित करने के आरोप में पुलिस ने 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब घटना स्थल के वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान करने में जुटी है।
पावर हाउसों का घेराव और अफसरों से तीखी भिड़ंत
सड़क जाम के बाद भी जब बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो जनता का गुस्सा गुरुवार और शुक्रवार की रात को दोबारा फूट पड़ा। रात के समय परेशान नागरिकों ने शहर के विभिन्न पावर हाउसों (बिजली घरों) को चारों तरफ से घेर लिया।
पावर हाउस परिसर में मौजूद बिजली विभाग के इंजीनियरों और कर्मचारियों के साथ उपभोक्ताओं की तीखी नोकझोंक और बहस हुई। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर भारी पुलिस बल को बुलाना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और बिजली विभाग के कर्मचारियों को सुरक्षित घेरे में लिया।
भीषण गर्मी और डगमगाती व्यवस्था: क्या है जनता का पक्ष?
स्थानीय निवासियों और क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इस समय लखनऊ में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है, जिससे बिजली की खपत अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। अत्यधिक लोड के कारण ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं और केबल फॉल्ट हो रहे हैं, जिससे घंटों तक सप्लाई ठप रहती है। लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबर काम नहीं करते और अफसर फोन नहीं उठाते। ऐसे दयनीय हालातों में बिना बिजली-पानी के रहना नामुमकिन हो गया था, जिसके चलते वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए थे।
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