श्रावस्ती में डीएम अन्नपूर्णा गर्ग का बड़ा एक्शन: ‘पत्थर नसब’ के मामलों के लिए चलाया विशेष अभियान…

Uttarpradesh

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद में जमीन जायदाद के सीमांकन और पत्थर नसब (मेढ़बंदी/सीमा तय करना) को लेकर आ रही दिक्कतों पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी (DM) अन्नपूर्णा गर्ग की एक बड़ी और जनहितैषी पहल के चलते जिले में सालों से लंबित पड़े पत्थर नसब के मामलों के निपटारे के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान से उन सैकड़ों ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है, जो अदालतों के आदेश के बावजूद अपनी ही जमीन की पैमाइश के लिए वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे।

सालों से धूल फांक रही थीं फाइलें, डीएम की समीक्षा में हुआ खुलासा

दरअसल, जिलाधिकारी को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सक्षम राजस्व न्यायालयों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर पत्थर नसब की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आपसी विवादों और प्रशासनिक सुस्ती के कारण लोग परेशान थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम अन्नपूर्णा गर्ग ने जनपद की सभी तहसीलों से पिछले तीन वर्षों से लंबित पड़े पत्थर नसब के मामलों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया और उनकी विस्तृत समीक्षा की। जब यह साफ हुआ कि बड़ी संख्या में केस लटके हुए हैं, तो डीएम के निर्देश पर एक महीने का विशेष अभियान शुरू किया गया।

राजस्व टीमों ने मौके पर जाकर सुलझाए विवाद: किस तहसील में क्या रही प्रगति?

इस विशेष अभियान के तहत राजस्व अधिकारियों, कानूनगो और लेखपालों की टीमों ने सीधे गांवों का रुख किया। विवादित जमीनों पर पहुंचकर मौके पर ही सीमांकन (पैमाइश) की गई और पत्थर नसब की कार्रवाई पूरी की गई।

अभियान के तहत अब तक की प्रगति पर एक नजर:

  • तहसील जमुनहा: यहां सबसे शानदार काम देखने को मिला, जहां कुल 128 लंबित मामलों में से 94 प्रकरणों का निस्तारण कर पत्थर नसब की कार्रवाई पूरी कर ली गई है।
  • तहसील भिनगा: इस तहसील में कुल 86 मामलों में से 43 प्रकरणों को सफलतापूर्ण निपटाया गया।
  • तहसील इकौना: यहां 172 मामलों में से 51 पुराने मामलों में पत्थर नसब का काम पूरा कराया जा चुका है।

इस तरह जिले में वर्षों से धूल फांक रही फाइलों पर त्वरित कार्रवाई होने से जमीन संबंधी विवादों में भारी कमी आई है।

“मानसून (वर्षा ऋतु) से पहले हर हाल में पूरा हो शत-प्रतिशत काम”

जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग ने इस अभियान की सफलता के बाद भी ढिलाई न बरतने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी संबंधित उपजिलाधिकारियों (SDM) और राजस्व अधिकारियों को साफ कहा है कि जो भी मामले अभी शेष बचे हैं, उन्हें प्राथमिकता (प्रायोरिटी) के आधार पर निपटाया जाए।

डीएम का सख्त निर्देश: जिलाधिकारी ने लक्ष्य तय किया है कि वर्षा ऋतु (बारिश का मौसम) शुरू होने से पहले जिले के शत-प्रतिशत (100%) लंबित मामलों में पत्थर नसब की कार्रवाई पूरी हो जानी चाहिए। बारिश के बाद खेतों में पानी भरने से पैमाइश का काम मुश्किल हो जाता है, इसलिए प्रशासन इससे पहले ही जमीन संबंधी विवादों का स्थायी समाधान करना चाहता है।

डीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि राजस्व न्यायालयों के आदेशों का समय पर पालन कराना प्रशासन की मुख्य प्राथमिकता है। जनता को त्वरित न्याय और राहत देने के लिए भविष्य में भी इस तरह के विशेष अभियान लगातार चलाए जाते रहेंगे।

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