भीषण गर्मी से राहत के लिए दिल्ली सरकार ने बनाए ‘कूलिंग जोन’…

Uttarakhand

दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और जानलेवा लू (Heatwave) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने यमुनापार के इलाकों में एक नई शुरुआत की है। यात्रियों, राहगीरों और मजदूरों को डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचाने के लिए विभिन्न व्यस्त इलाकों में लगभग 20 कूलिंग जोन (Cooling Zones) स्थापित किए गए हैं।

इन प्रमुख क्षेत्रों में बने हैं केंद्र:

आनंद विहार बस टर्मिनल, कोंडली, गणेश नगर और अन्य अधिक आवाजाही वाले मार्ग। क्या हैं इस पहल के फायदे और जमीनी कमियां? प्रशासन के इस कदम को लेकर जब ज़मीनी स्तर पर पड़ताल की गई, तो इसके कई बड़े फायदे और साथ ही कुछ बुनियादी कमियां भी सामने आईं:

फायदे (Positive Aspects)
बड़ी आबादी को राहत: जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, इन कूलिंग जोन से रोजाना 1000 से 1500 लोग लाभ उठा रहे हैं। ओआरएस (ORS) की व्यवस्था: साधारण पानी के साथ-साथ इन केंद्रों पर ओआरएस युक्त पानी भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जो धूप में निकलने वालों को तुरंत एनर्जी देता है। स्वयंसेवकों (Volunteers) की तैनाती: हर केंद्र पर 5 वॉलेंटियर्स तैनात हैं, जो न सिर्फ लोगों को पानी पिला रहे हैं, बल्कि उन्हें लू से बचने के तरीके भी समझा रहे हैं।

कमियां (Drawbacks & Public Grievances)
फर्स्ट एड बॉक्स गायब: भीषण गर्मी में चक्कर आना या बेहोश होना आम बात है, लेकिन अधिकांश कूलिंग जोन पर प्राथमिक उपचार (First Aid) की कोई व्यवस्था नहीं पाई गई। पानी ठंडा रखने के पुख्ता इंतजाम नहीं: पेयजल को लंबे समय तक ठंडा रखने के लिए किसी विशेष आधुनिक उपकरण (जैसे वॉटर कूलर या आइस बॉक्स) का अभाव दिखा। कई कूलिंग जोन फुटपाथ के किनारे बनाए गए हैं। वहां इतनी जगह या शेड नहीं है कि लोग छांव में बैठ सकें। नतीजतन, लोगों को तपती धूप में सड़क किनारे खड़े होकर पानी पीना पड़ रहा है।

जनता की राय:

कूलिंग जोन का इस्तेमाल करने वाले राहगीरों का कहना है कि प्रशासन की यह पहल बेहद सराहनीय है और इससे बहुत मदद मिल रही है। लेकिन अगर सरकार यहां शेड (छाया) और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था भी दुरुस्त कर दे, तो यह योजना पूरी तरह सफल साबित होगी।

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