जींद : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल रेल सेवा के रूप में पेश किया गया था, लेकिन शुरुआती संचालन के आंकड़े इसकी आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जींद-सोनीपत रूट पर चल रही इस ट्रेन के संचालन में प्रतिदिन करीब ₹80 से ₹90 हजार केवल हाइड्रोजन गैस पर खर्च हो रहे हैं, जबकि टिकटों से औसतन करीब ₹7 हजार की ही आय हो रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की लागत लगभग ₹500 प्रति किलोमीटर है। जींद और सोनीपत के बीच ट्रेन प्रतिदिन करीब 160 किलोमीटर का सफर तय करती है। गैस खर्च के अलावा रखरखाव, तकनीकी निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य परिचालन खर्च भी अलग से जुड़ते हैं, जिससे कुल लागत और बढ़ जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद से ट्रेन का नियमित संचालन जारी है। रेलवे की तकनीकी टीमें लगातार ट्रेन की ईंधन खपत, सुरक्षा प्रणाली, गति और प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए हैं। यह ट्रेन प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे जींद से सोनीपत के लिए रवाना होती है।
यात्रियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जींद से सोनीपत जाने वाले यात्रियों की संख्या अब तक 50 के आंकड़े को पार नहीं कर सकी है। हालांकि सोनीपत से जींद आने वाले यात्रियों की संख्या 100 से अधिक रहती है। वहीं बीच के स्टेशनों पर भी करीब 100 से 120 यात्री यात्रा करते हैं। ट्रेन शुरू होने के बाद अब तक कुल 307 यात्री इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं।
रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने से पहले जींद-सोनीपत रूट पर 90 मासिक सीजन टिकट (MST) धारक थे। ट्रेन शुरू होने के बाद सात नए एमएसटी भी जारी किए गए हैं। वाणिज्यिक अधीक्षक धीरज बुटानी का कहना है कि फिलहाल एमएसटी की संख्या में बड़ा इजाफा नहीं हुआ है, लेकिन समय के साथ नियमित यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि शुरुआती चरण में कम यात्री मिलना स्वाभाविक है और भविष्य में इस आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल रेल सेवा को बेहतर प्रतिसाद मिल सकता है।
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