भारत की प्रतिष्ठित शहरी विरासतों में शामिल चंडीगढ़ के ऐतिहासिक फर्नीचर की विदेश में नीलामी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। अमेरिका में हुई इस नीलामी ने न केवल सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी तंत्र की निष्क्रियता को लेकर भी बहस तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
चंडीगढ़ की विश्वप्रसिद्ध विरासत से जुड़ी मूल फर्नीचर वस्तुओं की अमेरिका स्थित एक ऑक्शन हाउस में नीलामी कर दी गई। यह नीलामी ऐसे समय में हुई, जब इस पर रोक लगाने की चेतावनी पहले ही केंद्र सरकार को दी जा चुकी थी। हेरिटेज संरक्षण के लिए लंबे समय से आवाज उठाने वाले अधिवक्ता अजय जग्गा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सरकार को पहले ही दी गई थी जानकारी
अजय जग्गा के अनुसार, उन्होंने 4 जून को अमेरिका में होने वाली इस नीलामी की जानकारी पहले ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर दी थी। इसके बावजूद नीलामी को रोका नहीं जा सका और चंडीगढ़ की सात दुर्लभ विरासत वस्तुएं विदेश में बेच दी गईं।
कितनी कीमत में बिका फर्नीचर?
नीलामी में इन ऐतिहासिक वस्तुओं की कुल कीमत लगभग 1.16 करोड़ रुपये रही। इनमें सबसे महंगी वस्तु चंडीगढ़ की प्रसिद्ध लाउंज चेयर की एक जोड़ी रही, जिसकी कीमत करीब 37.80 लाख रुपये लगाई गई। ये सभी फर्नीचर प्रसिद्ध डिजाइनर पियरे जेनरे द्वारा डिजाइन किए गए थे, जो चंडीगढ़ की वास्तुकला और डिज़ाइन विरासत का अहम हिस्सा माने जाते हैं।
विरासत फर्नीचर की तस्करी पर चिंता
अजय जग्गा ने आरोप लगाया कि वर्षों से चंडीगढ़ के सरकारी संस्थानों से विरासत फर्नीचर गायब हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तथा निजी कलेक्शनों तक पहुंच रहा है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक विरासत की “धीरे-धीरे हो रही लूट” करार दिया और इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
नीलाम की गई वस्तुओं की उत्पत्ति और स्वामित्व की जांचभविष्य में ऐसी नीलामियों को रोकने के लिए भारतीय दूतावासों को सक्रिय करना चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर को ‘आर्ट ट्रेजर’ घोषित करनाइन वस्तुओं को कानूनी संरक्षण देकर देश से बाहर जाने पर रोक लगाना
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
चंडीगढ़ न केवल भारत का एक आधुनिक शहर है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अनूठी वास्तुकला और डिजाइन के लिए जाना जाता है। यहां का फर्नीचर, विशेष रूप से पियरे जेनरे द्वारा डिजाइन किए गए आइटम, विश्वभर में संग्रहणीय (collectible) माने जाते हैं। ऐसे में इनका देश से बाहर जाना भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है। चंडीगढ़ के ऐतिहासिक फर्नीचर की विदेश में हो रही नीलामी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत अपनी अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने में सक्षम है? अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस नीति बनाती है।
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