राजस्थान सीमा से सटे जिलों में रेत का गुबार
गुरुवार शाम करीब 4 बजे हरियाणा के मौसम में अचानक खतरनाक मोड़ आया। विशेषकर राजस्थान की सीमा से लगते जिलों में दिन में ही अंधेरा छा गया। आसमान पूरी तरह से रेत की मोटी चादर में लिपट गया, जिससे दृश्यता (Visibility) बेहद कम हो गई। सड़कों पर चल रहे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और गाड़ियों की हेडलाइट्स जलानी पड़ीं। तेज अंधड़ के कारण कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए और होर्डिंग्स गिर गए।
शिक्षा मंत्री के काफिले के साथ हादसा
इस प्राकृतिक आफत के बीच कैथल जिले से एक बड़े हादसे की खबर आई। हरियाणा के शिक्षा मंत्री का काफिला जब वहां से गुजर रहा था, तभी तेज आंधी के कारण एक बिजली का भारी-भरकम पोल उखड़कर काफिले की सुरक्षा में चल रही पायलट गाड़ी पर जा गिरा।
इस अचानक हुए हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
गाड़ी में सवार चार पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
गनीमत यह रही कि शिक्षा मंत्री की गाड़ी इस दुर्घटना की चपेट में आने से बाल-बाल बच गई और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
14 शहरों में बारिश से थमी तपिश, इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान
धूल भरी आंधी के तुरंत बाद प्रदेश के लगभग 14 शहरों में झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस बारिश से पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और लू (Heatwave) झेल रहे लोगों को बड़ी राहत मिली और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, इस राहत के साथ-साथ आंधी-पानी ने भारी तबाही भी मचाई। कई जिलों में बिजली के खंभे और हाई-टेंशन तार टूट कर गिर गए, जिससे दर्जनों गांवों और शहरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। बिजली विभाग की टीमें व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुट गई हैं।
क्यों बदला मौसम? (मौसम विभाग का पूर्वानुमान)
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हुआ है। इसी मौसमी प्रणाली के प्रभाव के कारण हवा के कम दबाव का क्षेत्र बना और राजस्थान की ओर से तेज रेतीली हवाएं हरियाणा में दाखिल हुईं। मौसम विभाग ने पहले ही इसके लिए चेतावनी जारी की थी और कहा है कि 6 जून तक प्रदेश के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है।
प्रशासन की अपील
अचानक बदले इस मौसम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे तेज आंधी और बारिश के दौरान घरों से बाहर न निकलें। विशेष रूप से बिजली के खंभों, जर्जर इमारतों और पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें ताकि किसी भी अप्रिय घटना से सुरक्षित रहा जा सके।
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