हरियाणा के चर्चित सरकारी खजाना घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने बैंकिंग सिस्टम और सरकारी तंत्र की कथित मिलीभगत का बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, IDFC First Bank के माध्यम से 722 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किए गए, जिनमें कई सरकारी विभागों का धन फर्जी खातों के जरिए डायवर्ट किया गया।
सीबीआई ने इस मामले में 15 आरोपियों को नामजद किया है। इनमें बैंक के तत्कालीन अधिकारी, हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी और निजी कंपनियों के संचालक शामिल हैं। आरोप है कि सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये कथित शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने सरकारी खातों से जुड़े अधिकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी बदल दिए, जिससे करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन के अलर्ट संबंधित विभागों तक नहीं पहुंचे। सीबीआई ने इसे सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी और बैंकिंग सुरक्षा में गंभीर सेंध बताया है।
चार्जशीट के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने KYC नियमों और सत्यापन प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए फर्जी खातों को मंजूरी दी। इसके बाद सरकारी धन को कई खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में ट्रांसफर कर मनी ट्रेल छिपाने (Layering) की कोशिश की गई। जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से डिलीट किया गया डेटा भी फोरेंसिक जांच के जरिए रिकवर किया गया है।
सीबीआई का कहना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग, बैंकिंग नियमों के उल्लंघन और सुनियोजित आपराधिक साजिश का मामला है। एजेंसी पूरे मनी ट्रेल और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच जारी रखे हुए है।
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