AAP में महाविस्फोट: राघव चड्ढा ने छोड़ी पार्टी, 2/3 सांसदों के साथ BJP में विलय का ऐलान!

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नई दिल्ली: दिल्ली और देश की राजनीति में आज उस समय हड़कंप मच गया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे चर्चित चेहरों में से एक और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफे की घोषणा कर दी। चड्ढा अकेले नहीं हैं; उन्होंने दावा किया है कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई सांसद भी बीजेपी (BJP) का दामन थामने जा रहे हैं।

‘गलत पार्टी में सही आदमी’: राघव चड्ढा का छलका दर्द

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा भावुक नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व पर प्रहार करते हुए कहा:

“मैंने अपनी जवानी के 15 साल और अपना खून-पसीना इस पार्टी को सींचने में लगा दिया। लेकिन आज AAP अपने उन बुनियादी उसूलों से भटक गई है, जिनके लिए इसका जन्म हुआ था। पिछले कुछ समय से मुझे महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूँ।”

राज्यसभा में AAP का किला ढहा, संवैधानिक विलय की तैयारी

राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी बीजेपी मुख्यालय पहुँच चुके हैं। चड्ढा का दावा है कि उनके पास राज्यसभा के 70% से अधिक सांसदों का समर्थन है। दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के तहत ‘विलय’ का रास्ता चुना है।

बीजेपी में शामिल होने वाले संभावित नाम:

. राघव चड्ढा
. संदीप पाठक
. अशोक मित्तल
. हरभजन सिंह
. स्वाति मालीवाल
. विक्रमजीत साहनी

संदीप पाठक को हाशिए पर धकेलना पड़ा भारी?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बगावत की पटकथा दिल्ली चुनाव के बाद ही लिखी जा चुकी थी। पार्टी की चुनावी रणनीति के मास्टरमाइंड माने जाने वाले संदीप पाठक को हार के बाद साइडलाइन कर दिया गया था। जहाँ सिसोदिया, जैन और आतिशी को बड़े राज्यों की कमान मिली, वहीं पाठक को केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित कर दिया गया। यही असंतोष आज एक बड़ी टूट के रूप में सामने आया है।

राज्यसभा में अब क्या है गणित?

आम आदमी पार्टी के पास राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे (7 पंजाब और 3 दिल्ली)। यदि यह विलय प्रभावी होता है, तो अरविंद केजरीवाल के पास सदन में केवल 3 सांसद (संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सिच्चेवाल) ही बचेंगे।

राघव चड्ढा का जाना आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और सांगठनिक झटका है। यह न केवल दिल्ली की सत्ता के समीकरणों को बदलेगा, बल्कि आगामी दिनों में पंजाब की राजनीति में भी बड़े उथल-पुथल के संकेत दे रहा है।

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