चंडीगढ़: सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब में सोमवार को एक ऐतिहासिक संयोग देखने को मिला। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां आम आदमी पार्टी के मंत्रियों और विधायकों के साथ श्री अकाल तख्त सचिवालय में पेश हुए। सिख इतिहास में यह दूसरा अवसर है, जब एक ही राजनीतिक परिवार की दो पीढ़ियां अलग-अलग समय पर अकाल तख्त के समक्ष पेश हुई हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड केवल बादल परिवार के नाम दर्ज था।
कुलतार सिंह संधवां, भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के भाई के पोते हैं। करीब 42 वर्ष पहले, वर्ष 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर श्री अकाल तख्त में तलब किया गया था। अब उनके परिवार की अगली पीढ़ी से जुड़े कुलतार सिंह संधवां की पेशी ने इस ऐतिहासिक संयोग को फिर चर्चा में ला दिया है।
जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा में पारित ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को लेकर उठे विवाद के बाद अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों और संबंधित नेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया था। इसी क्रम में स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, मंत्रियों और विधायकों के साथ अकाल तख्त पहुंचे। वे अकाल तख्त द्वारा तलब किए जाने वाले पंजाब विधानसभा के पहले स्पीकर भी बन गए हैं।
अकाल तख्त के इतिहास में इससे पहले बादल परिवार के दो प्रमुख सदस्य भी यहां पेश हो चुके हैं। वर्ष 1978 के सिख-निरंकारी विवाद के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होना पड़ा था, जबकि वर्ष 2024 में बेअदबी मामलों को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भी अकाल तख्त में पेश हुए थे।
श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है और इतिहास में कई बड़े राजनीतिक एवं सामाजिक नेताओं को यहां जवाब देना पड़ा है। इतिहास में महाराजा रणजीत सिंह, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला भी धार्मिक अनुशासन के मामलों में अकाल तख्त के समक्ष पेश हो चुके हैं। हाल के वर्षों में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जुड़े एक विवादित मामले को लेकर भी अकाल तख्त की कार्रवाई चर्चा में रही थी।
कुलतार सिंह संधवां की यह पेशी न केवल मौजूदा विवाद के कारण महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि इसे सिख इतिहास और पंजाब की राजनीति से जुड़े एक दुर्लभ ऐतिहासिक संयोग के रूप में भी देखा जा रहा है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
