हिमाचल प्रदेश में शराब की लत घट नहीं रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस 6) 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 15 वर्ष से अधिक आयु के 30.2 प्रतिशत पुरुषों ने शराब का सेवन करने की बात स्वीकार की है। हालांकि, यह आंकड़ा वर्ष 2019-21 के सर्वे में दर्ज 31.9 प्रतिशत की तुलना में कुछ कम हुआ है, बावजूद इसके हिमाचल उत्तर भारत में शराब सेवन के मामले में पहले स्थान पर बना हुआ है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में जारी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देशभर में शराब पीने वाले पुरुषों का सबसे अधिक प्रतिशत अरुणाचल प्रदेश में दर्ज किया गया है।
कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है अधिक सेवन
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि शराब का अत्यधिक सेवन यकृत, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य सामाजिक समस्याओं से भी इसका सीधा संबंध माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ती शराब की प्रवृत्ति को लेकर जागरूकता अभियान और नशा मुक्ति कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की जरूरत बताई है। सर्वे के अनुसार तंबाकू सेवन के मामले में भी हिमाचल आगे हैं। यहां 28.9 प्रतिशत पुरुष तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 29.5 और शहरों में 24.6 प्रतिशत लोगों ने तंबाकू को किसी ना किसी प्रकार से प्रयोग में लाने की बात स्वीकारी ह
हिमाचल में 38.2 प्रतिशत महिलाएं मोटापे की शिकार
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने हिमाचल प्रदेश की सामाजिक और स्वास्थ्य स्थिति की नई तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 38.2 प्रतिशत महिलाएं और 31.4 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आ चुके हैं। 2019 की तुलना में महिलाओं में यह आंकड़ा 30.4 प्रतिशत से बढ़कर 38.2 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों में कमी का परिणाम मान रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 20.6 प्रतिशत महिलाओं और 20 प्रतिशत पुरुषों में रक्त शर्करा का स्तर अधिक पाया गया या वे मधुमेह नियंत्रित करने की दवा ले रहे हैं। इसी तरह उच्च रक्तचाप से प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत 24.1 और पुरुषों का 31.7 दर्ज किया गया है।
बच्चों में कुपोषण घटा
पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) का स्तर 30.8 प्रतिशत से घटकर 20.6 प्रतिशत पर आ गया है। कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत भी 25.5 से घटकर 16.8 हुआ है। हालांकि यह आंकड़े अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। प्रदेश में 94.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने प्रसव पूर्व जांच करवाई, जबकि 83.2 प्रतिशत महिलाओं ने कम से कम चार एंटीनेटल जांचें कराईं। संस्थागत प्रसव 91.7 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं और 92.4 प्रतिशत प्रसव कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में हुए।
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