हिमाचल प्रदेश की महत्वाकांक्षी हिमकेयर स्वास्थ्य योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने जांच तेज कर दी है। शुरुआती जांच में जहां करीब 110 करोड़ रुपये के घोटाले की आशंका जताई गई थी, वहीं दस्तावेजों की गहन पड़ताल में अब लगभग 150 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान के अहम संकेत सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की जांच के दायरे में प्रदेश के 71 निजी अस्पताल हैं। जांच एजेंसियां इन अस्पतालों में हिमकेयर योजना के तहत किए गए दावों, मरीजों के इलाज, बिलिंग प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में फर्जी मरीजों, संदिग्ध बिलिंग और नियमों के विपरीत भुगतान जैसे कई मामलों के संकेत मिले हैं।
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। कुछ निजी अस्पताल न्यूनतम स्वास्थ्य मानकों को पूरा किए बिना ही संचालित किए जा रहे थे। इनमें ऐसे अस्पताल भी शामिल हैं जो केवल दो कमरों से चल रहे थे, लेकिन उन्होंने हिमकेयर योजना के तहत इलाज के नाम पर दावे पेश कर भुगतान प्राप्त किया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ मामलों में फर्जी मरीजों और उपचार के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
विजिलेंस अब संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि यदि अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो कई अस्पताल संचालकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद गिरफ्तारी सहित अन्य सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।
हिमकेयर योजना में सामने आए इस कथित फर्जीवाड़े ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
