कैंसर उपचार में AI की बड़ी छलांग: IIT रुड़की ने बनाया ‘ओमनीसिंक्स’ प्लेटफॉर्म, मरीज के अनुसार चुनेगा सुरक्षित दवाएं

Uttarakhand

कैंसर के इलाज में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नई क्रांति लेकर आया है। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक प्रो. कमल जैन ने एक अत्याधुनिक AI और कंप्यूटेशनल सर्च आधारित प्लेटफॉर्म ‘ओमनीसिंक्स (OmniSynx)’ विकसित किया है, जो मरीज की स्थिति के अनुसार सबसे सुरक्षित और प्रभावी दवाओं का संयोजन चुनने में मदद करेगा।

इस तकनीक को कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि यह प्लेटफॉर्म लाखों संभावित दवा संयोजनों का विश्लेषण कर डॉक्टरों को तेजी से और सटीक निर्णय लेने में सहायता करेगा।


77 करोड़ दवा संयोजनों का करेगा विश्लेषण

प्रो. कमल जैन के अनुसार, यह AI प्लेटफॉर्म 378 से अधिक दवाओं के लगभग 77 करोड़ संभावित संयोजनों का विश्लेषण करने में सक्षम है। इसका उद्देश्य मरीज के लिए ऐसे उपचार विकल्प चुनना है जो न केवल प्रभावी हों बल्कि साइड इफेक्ट्स के लिहाज से भी सुरक्षित हों।

यह सिस्टम मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी की स्टेज और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए केवल उपयुक्त दवाओं का सुझाव देता है।


कैंसर उपचार को बनाएगा अधिक तेज और सटीक

भारत में हर साल लगभग 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में मामलों का पता देर से चलता है। इस चुनौती को देखते हुए यह AI सिस्टम इलाज प्रक्रिया को तेज और अधिक सटीक बनाने में मदद कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डॉक्टरों के पास सीमित समय में हजारों दवाओं और जटिल मेडिकल डेटा का विश्लेषण करना संभव नहीं होता। ऐसे में यह AI प्लेटफॉर्म मात्र कुछ घंटों में महत्वपूर्ण उपचार विकल्प प्रस्तुत कर सकता है।


बिना बायोप्सी भी मिल सकेगा इलाज का विकल्प

इस प्लेटफॉर्म की एक खास बात यह है कि यह कई स्थितियों में बिना बायोप्सी डेटा के भी उपचार विकल्प सुझाने में सक्षम है। जब पारंपरिक जांच संभव न हो या जोखिम भरी हो, तब यह सिस्टम वैज्ञानिक शोध और उपलब्ध डेटा के आधार पर संभावित दवा संयोजन तैयार करता है।

यह सुविधा गंभीर और जटिल मामलों में डॉक्टरों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।


जटिल केस में भी दिखाया प्रभाव

प्रो. जैन ने बताया कि एक 63 वर्षीय थायराइड कैंसर मरीज के मामले में, जहां पारंपरिक उपचार विफल हो रहे थे और बायोप्सी करना जोखिमपूर्ण था, वहां इस प्लेटफॉर्म ने केवल 4 घंटे में प्रभावी दवा संयोजन सुझाया।

इसके बाद मरीज के इलाज में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले, जो इस तकनीक की क्षमता को दर्शाता है।


भविष्य में और भी उन्नत होगी तकनीक

शोधकर्ताओं का मानना है कि आने वाले समय में यह प्लेटफॉर्म पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन डिजाइन करने और दवाओं के संभावित साइड इफेक्ट्स की पहले से भविष्यवाणी करने में भी सक्षम हो सकता है।

विशेषज्ञ इसे कैंसर उपचार की दिशा में एक बड़ा तकनीकी बदलाव मान रहे हैं, जो भविष्य में लाखों मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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