मसूरी में बीती रात आए तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। शहर के विभिन्न इलाकों में तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए, टहनियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं और कई मकानों की छतें तक उड़ गईं।आंधी-तूफान का असर शहर के प्रमुख इलाकों में साफ देखने को मिला। माल रोड पर पेड़ों की टहनियां टूटकर सड़क पर आ गिरीं, जिससे कई दोपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं मसूरी-देहरादून मार्ग पर भी कई पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ।इंदिरा कॉलोनी और कैमल बैक रोड जैसे क्षेत्रों से भी नुकसान की खबरें सामने आई हैं, जहां कई घरों की छतें उड़ गईं और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग की चेतावनी साबित हुई सटीक
मौसम विभाग ने पहले ही चार दिनों तक आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी जारी की थी, जो अब सटीक साबित होती नजर आ रही है। तेज हवाओं और बारिश ने पूरे शहर में असर दिखाया है, घटना के बाद नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी और अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सूखे और कमजोर पेड़ों की तुरंत लॉपिंग (कटाई-छंटाई) की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि बरसात से पहले सभी नालों और खालों की सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जलभराव की स्थिति न बने।
लापरवाही बनी नुकसान की वजह
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि समय पर पेड़ों की लॉपिंग न होने के कारण नुकसान ज्यादा हुआ है। साथ ही पुराने मकानों की छतें भी तेज हवाओं का सामना नहीं कर सकीं। वहीं सभासद गीता कुमाई ने बताया कि उन्होंने पहले ही वन विभाग को पेड़ों की लॉपिंग के लिए पत्र लिखा था। वन विभाग ने कुछ पेड़ों को चिन्हित भी किया था, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने से नुकसान बढ़ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही प्राकृतिक छेड़छाड़ और अवैध खनन के चलते पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है, जिसका असर अब इस तरह की आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है।
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