ओखला लैंडफिल का काला सच: जहरीले पहाड़ पर मजदूरी, कीमत बन रही सेहत

Delhi

नई दिल्ली: राजधानी के दक्षिणी हिस्से में स्थित ओखला लैंडफिल अब सिर्फ कचरे का ढेर नहीं, बल्कि हजारों मजदूरों के लिए “जहरीला पहाड़” बन चुका है। यहां रोजी-रोटी कमाने वाले मजदूर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम झेल रहे हैं। एक ताजा अध्ययन ने इस हकीकत को सामने लाकर चिंता और बढ़ा दी है।


क्या कहता है अध्ययन?

इग्नू की प्रोफेसर शाची शाह और यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख की शोधकर्ता सोनम एंगमो द्वारा किए गए अध्ययन में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

  • 76% मजदूर किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे हैं
  • 36 मजदूरों को त्वचा संबंधी समस्याएं
  • 32 मजदूरों को सांस की बीमारियां
  • 23 को आंखों में जलन या बाल झड़ने की शिकायत
  • 8.5% मजदूरों में दिल से जुड़ी समस्याएं

यह अध्ययन 107 मजदूरों से बातचीत पर आधारित है, जिनमें अधिकांश की उम्र 30 से 40 साल के बीच है।


60 लाख टन कचरे का खतरा

ओखला लैंडफिल में करीब 55 से 60 लाख टन पुराना कचरा जमा है। यह साइट 1996 में शुरू हुई थी और 2010 में भर चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी यहां कचरा डाला जाता रहा।

  • रोजाना करीब 2000 टन कचरा आता है
  • 46% कचरा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में जाता है
  • बाकी सीधे लैंडफिल में फेंका जाता है

सुरक्षा और सुविधाओं की बदहाल हालत

मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है:

  • 51% मजदूरों ने टॉयलेट और आरामघरों को अस्वच्छ बताया
  • जहरीले पानी (लीचेट) के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं
  • PPE किट की गुणवत्ता खराब—मास्क और दस्ताने जल्दी फट जाते हैं
  • आज तक साइट पर नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं हुई

बारिश में बढ़ता खतरा

मानसून के दौरान स्थिति और खतरनाक हो जाती है। कचरे से निकलने वाला जहरीला पानी नालियों के जरिए आसपास के इलाकों में फैल जाता है, जिससे पर्यावरण और लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ता है।


पर्यावरण के लिए भी खतरा

यह लैंडफिल ओखला बर्ड सैंक्चुअरी जैसे इको-सेंसिटिव क्षेत्र के पास स्थित है। ऐसे में यहां से निकलने वाली जहरीली गैसें और प्रदूषण पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा हैं।


क्या हैं समाधान?

शोधकर्ताओं ने स्थिति सुधारने के लिए कई सुझाव दिए हैं:

  • हर वार्ड में कचरा सेग्रिगेशन सेंटर बनाए जाएं
  • रैग-पिकर्स को स्वास्थ्य कार्ड और सुविधाएं मिलें
  • मजदूरों के लिए सालाना हेल्थ चेकअप अनिवार्य हो
  • बेहतर क्वालिटी के PPE किट उपलब्ध कराए जाएं
  • लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएं
  • स्रोत पर कचरे को अलग करने की व्यवस्था मजबूत हो

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