देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण की एक नई गूंज सुनाई दी। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अधिनियम को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम बताया।
भविष्य की दिशा तय करेगा यह कानून: सावित्री ठाकुर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह करोड़ों महिलाओं के आत्मविश्वास और सम्मान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला माध्यम है।
उन्होंने अपने संबोधन के मुख्य अंशु में कहा:
. दशकों का इंतजार खत्म: देश को इस कानून का दशकों से इंतजार था, जिससे मोदी सरकार ने धरातल पर उतारा है।
. नीति निर्माण में भागीदारी: अब महिलाएं केवल मतदाता बनकर नहीं रहेंगी, बल्कि देश के नीति निर्माण पॉलिसी मेकिंग में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी।
. स्वयं का उदाहरण: उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मैं इस बात का साक्षात उदाहरण हूं कि जब अवसर मिलता है, तो एक साधारण व्यक्तित्व वाली महिला भी मजबूती से शिखर तक पहुंच सकती हैं।
महिलाओं की भागीदारी अब सुझावों से ऊपर: CM धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मेलन में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए इसे एक क्रांतिकारी बदलाव करार दिया उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब देश की आधी आबादी निर्णयो और नीतियों में सम्मान हिस्सेदारी रखेंगी।
अब हमारी माताएं बहने केवल सुझाव देने तक सीमित नहीं रहेंगी। देश के भविष्य, सभी महत्वपूर्ण निर्णय और नीतियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और अहम हिस्सेदारी सुनिश्चित हो चुकी है। – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
महिला सशक्तिकरण उज्जवल भविष्य की आधारशिला
इस सम्मेलन का सार यही रहा कि नारी शक्ति बंदन अधिनियम भारत के उज्जवल भविष्य के आधारशिला है। यह कानून न केवल समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की आवाज को मजबूती देगा, बल्कि शासन-प्रशासन में संवेदनशीलता और जवाबदेही भी बढ़ाएगा।
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