गर्मी की छुट्टियों के बीच विभाग का सख्त रुख
हरियाणा में भीषण गर्मी को देखते हुए 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है। इसी के साथ शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के स्टॉक को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
विभाग ने साफ कर दिया है कि छुट्टियों के दौरान यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही से खाद्यान्न खराब होता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल स्टाफ की होगी।
स्टॉक का पूरा ब्योरा मांगा गया
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे मिड-डे मील में उपयोग होने वाले खाद्यान्न—
गेहूं, चावल, दाल, तेल और अन्य सामग्री का पूरा विवरण उपलब्ध कराएं।
साथ ही स्कूल मुखियाओं को तय समय के भीतर स्टॉक का रिकॉर्ड जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता पर नजर रखी जा सके।
स्टोरेज और सुरक्षा पर विशेष जोर
चूंकि छुट्टियों के दौरान स्कूल बंद रहेंगे, ऐसे में विभाग ने खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण (स्टोरेज) को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा है।
- राशन को नमी और गर्मी से बचाने के निर्देश
- सुरक्षित और हवादार स्थान पर स्टोरेज
- नियमित निरीक्षण की व्यवस्था
अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में खाद्यान्न खराब होने की आशंका अधिक रहती है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।
अतिरिक्त स्टॉक तुरंत लौटाने के निर्देश
जिन स्कूलों में मिड-डे मील का स्टॉक अधिक मात्रा में बचा हुआ है या खराब होने की संभावना है, वहां से राशन को तुरंत वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस कदम का उद्देश्य खाद्यान्न की बर्बादी को रोकना और संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है।
मिड-डे मील योजना का महत्व
मिड-डे मील योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को स्कूलों में भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने और स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में पाया गया कि स्टॉक खराब हुआ है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
