14 जुलाई तक पानी नहीं मिला तो 17 जुलाई को पीएम मोदी के सामने रखी जाएगी मांग, 32 खापों का अल्टीमेटम

Haryana

हरियाणा के हांसी स्थित गांव चानौत में भाखड़ा पेयजल पाइपलाइन से टी-कनेक्शन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। शुक्रवार को आयोजित महापंचायत में प्रदेश की 32 खाप पंचायतों और किसान संगठनों ने सरकार को 14 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है।

खाप प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय तक ग्रामीणों को पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो 17 जुलाई को जींद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अपनी मांग रखी जाएगी।

32 खाप पंचायतें और किसान संगठन हुए एकजुट

करीब तीन घंटे तक चली महापंचायत में कलकल, हुड्डा, बारह, सतरोल, रोघी, दूहन, बूरा, आठगामा, पूनिया सहित 32 खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों और विभिन्न किसान संगठनों ने हिस्सा लिया।

महापंचायत की अध्यक्षता सर्वजातीय रोघी खाप के प्रधान हरदीप शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि सरकार को समस्या के समाधान के लिए अंतिम अवसर दिया जा रहा है।

15 और 16 जुलाई को जींद में जुटेंगी खापें

हरदीप शर्मा ने बताया कि यदि 14 जुलाई तक कोई समाधान नहीं निकला तो 15 और 16 जुलाई को खाप पंचायतों और किसान संगठनों के प्रतिनिधि जींद पहुंचना शुरू कर देंगे। इसके बाद 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष ग्रामीणों की पेयजल समस्या को उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए ग्रामीणों को पिछले 56 दिनों से धरना देना पड़ रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

सरकार की नीति पर उठाए सवाल

महापंचायत में खाप प्रतिनिधियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पहले प्रशासन स्वयं टी-कनेक्शन लगवाता है और बाद में उन्हें हटाकर ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर देता है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि लोगों को पेयजल के लिए आंदोलन करने की नौबत न आए।

सोशल मीडिया पर भी तेज होगा आंदोलन

आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए सोशल मीडिया अभियान भी चलाया जाएगा। धरना समिति के सदस्य अनूप सिंह चानौत ने बताया कि प्रधानमंत्री के दौरे से पहले इस मुद्दे को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर ट्रेंड कराया जाएगा। आंदोलन से जुड़े युवा एक साथ पोस्ट कर अपनी मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 17 जुलाई के बाद आमरण अनशन जैसे अगले चरण के आंदोलन पर फैसला लिया जाएगा।

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