हिमाचल प्रदेश की वीरभूमि ने देश की रक्षा के लिए अपने सर्वोच्च बलिदान की गौरवशाली परंपरा को एक बार फिर दोहराया है। बिलासपुर जिले की सनीहरा पंचायत के छोटे से गांव ‘थेह’ के जांबाज सपूत लांस दफादार बलदेव चंद को उनके अदम्य साहस, अद्भूत वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया गया है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित एक बेहद भावुक और गरिमामयी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया। शहीद बलदेव चंद की बुजुर्ग माता विजया देवी और पत्नी शिवानी ने जब भारी मन और गर्व से तनी छाती के साथ यह सर्वोच्च सम्मान ग्रहण किया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
उधमपुर मुठभेड़: जब साथियों को बचाने के लिए काल बन गए बलदेव
यह कहानी है 19 सितंबर 2025 की, जब जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के सियोज धार खड्ड नाला क्षेत्र में सेना की एक टुकड़ी सर्च ऑपरेशन चला रही थी। तभी अचानक घने जंगलों में घात लगाकर बैठे अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों ने सेना के दल पर अंधाधुंध गोलाबारी शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से बलदेव चंद की टुकड़ी के कई जवान सीधे दुश्मनों की गोलियों के निशाने पर आ गए थे।
हालात बेहद नाजुक थे, चारों तरफ से गोलियां बरस रही थीं। ऐसे मौत के सन्नाटे के बीच लांस दफादार बलदेव चंद ने अपनी जान की परवाह न करते हुए वो किया जिसकी कल्पना भी मुश्किल है। वे रेंगते हुए और गोलियों की बौछार को चीरते हुए सीधे आतंकियों की पोजीशन की तरफ बढ़ गए।
आमने-सामने की भिड़ंत: आतंकी को दबोचा, विदेशी पिस्तौल छीनी
आतंकियों के बिल्कुल करीब पहुंचकर बलदेव चंद दुश्मन पर शेर की तरह झपट पड़े। दोनों के बीच आमने-सामने की खूनी हाथापाई शुरू हो गई। अदम्य साहस का परिचय देते हुए बलदेव ने एक खूंखार आतंकी को जिंदा दबोच लिया और ताकत के दम पर उसके हाथ से विदेशी निर्मित पिस्तौल छीन ली। अपनी जान को पूरी तरह जोखिम में डालकर उन्होंने न सिर्फ दुश्मन के घेरे को तोड़ा, बल्कि संकट में फंसे अपने कई साथी जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला और अपनी टीम को दोबारा संगठित होने का मौका दिया।
सीने पर खाई गोली, लेकिन आखिरी सांस तक नहीं छोड़ी बंदूक
इस भीषण मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की एक गोली लांस दफादार बलदेव चंद के सीने को चीरती हुई पार हो गई। सीने में गोली लगने के बाद शरीर से खून का फव्वारा छूट रहा था, लेकिन इस हिमाचली जांबाज ने अपनी राइफल नहीं छोड़ी। असहनीय दर्द और अत्यधिक खून बहने के बावजूद बलदेव अंतिम सांस तक आतंकियों पर गोलियां बरसाते रहे और अंततः मां भारती की गोद में सदा के लिए सो गए।
गांव थेह में गर्व और गम के आंसू
शहीद बलदेव चंद की इस बेमिसाल बहादुरी पर आज पूरा देश गर्व से गदगद है। बिलासपुर के थेह गांव में इस सर्वोच्च सम्मान की खबर पहुंचते ही हर किसी की आंखें छलक आईं। ग्रामीणों का कहना है कि: “हमने अपने गांव का एक होनहार बेटा खोया है, जिसका दर्द जिंदगी भर रहेगा। लेकिन बलदेव ने कायरों की तरह पीठ पर नहीं, बल्कि शेर की तरह सीने पर गोली खाई है। उसने मरते-मरते भी आतंकी को धूल चटा दी। हमें गर्व है कि हम उस धरती पर रहते हैं जहाँ बलदेव जैसा वीर पैदा हुआ था।” लांस दफादार बलदेव चंद की यह अमर शहादत और शौर्य चक्र की गाथा आने वाली पीढ़ियों के दिलों में देशभक्ति की लौ को हमेशा रोशन रखेगी।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
