उत्तराखंड: लालकुआं कोतवाली क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि एक ओर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, जबकि दूसरी ओर आबकारी विभाग की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस की कार्रवाई जारी, फिर भी नहीं थम रहा धंधा
पिछले कुछ समय में लालकुआं पुलिस ने कई इलाकों में छापेमारी कर भारी मात्रा में कच्ची शराब बरामद की है। इसके साथ ही कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है। बावजूद इसके, यह अवैध कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा।
यह स्थिति साफ संकेत देती है कि मामला केवल छोटे स्तर का नहीं, बल्कि एक बड़े और संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
कहां बन रही है इतनी बड़ी मात्रा में शराब?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में कच्ची शराब बन कहां रही है और इसका संचालन किसके संरक्षण में हो रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, तो आबकारी विभाग को भी आगे आकर इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना चाहिए।
आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल
आबकारी विभाग की चुप्पी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। लोगों का कहना है कि विभाग को शराब बनाने वाले ठिकानों की पहचान कर उन्हें पूरी तरह खत्म करना चाहिए, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नजर नहीं आ रहा।
इस निष्क्रियता के चलते यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।
संगठित नेटवर्क होने की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कारोबार किसी छोटे स्तर का नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में संचालित हो रहा है। केवल छोटे तस्करों को पकड़ने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए पूरे सप्लाई चेन को तोड़ना जरूरी है।
बड़ा खतरा: जहरीली शराब का डर
अगर समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह कारोबार किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। जहरीली शराब से जनहानि की आशंका भी लगातार बनी हुई है, जो प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
अब सबकी नजर आबकारी विभाग पर
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग कब सक्रिय होता है और इस अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाता है। फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई जारी है, लेकिन बिना विभागीय सहयोग के इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल दिख रहा है।
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