नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर बड़ा सवाल उठाते हुए देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र भेजा है। उन्होंने कंपनियों से पुराने वाहनों में E-20 ईंधन के इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक रूप से अपना स्पष्ट रुख बताने की मांग की है। केजरीवाल का कहना है कि कंपनियों के सार्वजनिक बयानों और उनके आधिकारिक ओनर्स मैनुअल में विरोधाभास दिखाई देता है, जिससे लाखों वाहन मालिक भ्रम की स्थिति में हैं।
केजरीवाल ने बताया कि मारुति, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो को अलग से पत्र भेजा गया है, जबकि बाकी 26 ऑटो कंपनियों को एक अन्य पत्र भेजकर इसी मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनका कहना है कि यह पहल उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने और वाहन सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
उन्होंने 4 जुलाई को आयोजित सरकार की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान ऑटो कंपनियों के प्रतिनिधियों ने दावा किया था कि पुराने वाहनों में भी E-20 ईंधन का उपयोग सुरक्षित है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इससे माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, लेकिन वाहन को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।
केजरीवाल का आरोप है कि इन कंपनियों के ओनर्स मैनुअल में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि 2023 से पहले निर्मित वाहनों में 10 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E10 से अधिक) का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि आधिकारिक दस्तावेज और सार्वजनिक बयान अलग-अलग जानकारी दे रहे हैं, तो यह एक गंभीर मामला है और इसे मामूली विरोधाभास नहीं माना जा सकता।
उन्होंने सभी कंपनियों से लिखित रूप में स्पष्ट करने की मांग की है कि पुराने वाहनों में E-20 पेट्रोल के उपयोग को लेकर उनकी वास्तविक और आधिकारिक नीति क्या है। उनका कहना है कि इससे करोड़ों वाहन मालिकों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी और उपभोक्ता हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में ऑटो कंपनियों के आधिकारिक रुख और तकनीकी दिशा-निर्देशों को लेकर स्पष्टता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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