शिमला: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद के बीच हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल और कांग्रेस विधायकों के साथ शिमला के ऐतिहासिक राम मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना, हवन और भजन-कीर्तन में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और आस्था पर किसी भी तरह की चोट स्वीकार नहीं की जा सकती।
मंत्रिमंडल और विधायकों के साथ की पूजा-अर्चना
मुख्यमंत्री सुक्खू पैदल मार्च करते हुए राम मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों के साथ भगवान श्रीराम का अभिषेक किया, मंदिर की परिक्रमा की और विशेष हवन में आहुति देकर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी भी की।
‘आस्था का सम्मान होना चाहिए’
पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि राम मंदिर के चढ़ावे में अनियमितता के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से सहयोग राशि जुटाई जा रही थी, तब उन्होंने भी विधायक रहते हुए अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर हिमाचल सरकार ने पूरे दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था।
BJP पर राजनीति करने का आरोप
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवान श्रीराम किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था के प्रतीक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सच्ची श्रद्धा उनके आदर्शों पर चलने में है। उन्होंने भगवान श्रीराम से प्रार्थना की कि आस्था को ठेस पहुंचाने वालों को सद्बुद्धि मिले।
राजीव गांधी की भूमिका का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन में उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा धार्मिक आस्था का सम्मान करती रही है और इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।
विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट से तेज हुई सियासत
इस बीच, हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा, “हे रघुनंदन, हम शर्मिंदा हैं, आपके नाम पर सत्ता भोगने वाले आज भी जिंदा हैं…” हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन इस पोस्ट को राम मंदिर से जुड़े कथित विवाद पर उनकी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। उनके बयान के बाद प्रदेश में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।
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