हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत अब आधुनिक तकनीक के साथ नए रूप में लोगों के सामने आएगी। राजधानी शिमला स्थित ऐतिहासिक बैंटनी कैसल को प्रदेश के पहले डिजिटल संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू 10 जुलाई को इस अत्याधुनिक संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना प्रदेश के पर्यटन और संस्कृति क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
इस डिजिटल संग्रहालय की सबसे बड़ी खासियत इसकी इंटरेक्टिव टच स्क्रीन और वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक है। आगंतुक सिर्फ एक स्पर्श के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के इतिहास, कला, संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, स्मारकों और ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आधुनिक तकनीक की मदद से संग्रहालय का अनुभव पहले से कहीं अधिक रोचक और आकर्षक बनाया गया है।
भाषा एवं संस्कृति विभाग ने इस संग्रहालय का विस्तार करते हुए पारंपरिक प्रदर्शनों को डिजिटल स्वरूप दिया है। यहां पहले से प्रदर्शित शिमला का इतिहास, महात्मा गांधी का शिमला दौरा, कांगड़ा कलम, चंबा थाल, कांगड़ी टोपी, हिमाचली शॉल और ऐतिहासिक स्मारकों की जानकारी अब डिजिटल स्क्रीन और वीआर तकनीक के जरिए विस्तार से देखने और समझने को मिलेगी।
यह संग्रहालय न केवल पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा, बल्कि स्थानीय लोगों और युवाओं को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से आधुनिक माध्यम के जरिए जोड़ने का काम करेगा। संग्रहालय प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहेगा। इसके बाद पर्यटक लाइट एंड साउंड शो का आनंद भी ले सकेंगे, जिसके लिए प्रति व्यक्ति 100 रुपये का टिकट निर्धारित किया गया है।
उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक रीमा कश्यप सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। इस डिजिटल संग्रहालय को हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसे आधुनिक तरीके से पहुंचाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
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