बिजली कटौती पर सीएम योगी का ‘हाई वोल्टेज’ पलटवार…

Uttarpradesh

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महापौर (मेयर) और पार्षदों के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। मंच वैसे तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपलब्धियों के जश्न का था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके का इस्तेमाल विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा राजनीतिक हमला बोलने के लिए किया।

‘भारत माता की जय’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों का जो हाल था, वह आज किसी से छिपा नहीं है।

“आज बिजली संकट की बात करने वाले पहले अपना अतीत देखें”
हाल के दिनों में बिजली कटौती को लेकर सरकार को घेर रहे विपक्षी नेताओं को मुख्यमंत्री ने मंच से बेहद कड़ा और सीधा जवाब दिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा: “पिछली सरकारों के दौर में उत्तर प्रदेश में बिजली आती ही कहां थी? हालत यह थी कि लोग बिजली के तारों पर अपने कपड़े सुखाया करते थे। और आज वही लोग प्रदेश में बिजली संकट को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं और राजनीति चमका रहे हैं।”

वैश्विक तनाव को बताया बिजली संकट की वजह
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस समारोह में सीएम योगी ने वर्तमान बिजली संकट की व्यावहारिक वजहें भी सामने रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली की किल्लत सिर्फ यूपी या भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की चुनौती है। मुख्यमंत्री ने वैश्विक हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) प्रभावित हुई है, लेकिन विपक्ष जमीनी हकीकत को समझने के बजाय इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटा है।

जनता से की अपील: “अनावश्यक स्ट्रीट लाइट बंद करें, ऊर्जा बचाएं”
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने आम जनता से भी जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग जरूरत के हिसाब से ही बिजली का उपयोग करें। उन्होंने नगर निगमों और आम लोगों से कहा कि दिन के समय या अनावश्यक रूप से जलने वाली स्ट्रीट लाइटों को बंद रखा जाए ताकि ऊर्जा की बचत हो सके।

2017 बनाम आज का उत्तर प्रदेश (बिजली उत्पादन का गणित):

वर्ष 2017 से पहले: उत्तर प्रदेश में मात्र 6,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था। वर्तमान स्थिति: आज प्रदेश का बिजली उत्पादन बढ़कर 13,000 मेगावाट से अधिक हो चुका है, जिससे पूरी व्यवस्था में व्यापक सुधार आया है।

“विपक्ष के एजेंडे में सिर्फ उनका परिवार था, जनता नहीं”
सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर विकास के नाम पर केवल ‘गड्ढे’ और ‘कूड़े के ढेर’ छोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इन गड्ढों को भरने और कूड़ेदानों को साफ करने का काम किया है। अब लक्ष्य लखनऊ को एक स्वच्छ, सुव्यवस्थित और आधुनिक राजधानी बनाना है। पूर्ववर्ती सरकारों पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पहले के एजेंडे में न युवा थे, न महिलाएं, न गरीब और न ही किसान; बल्कि सिर्फ कुछ खास रसूखदार लोगों के परिवारों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता था। इसके उलट, वर्तमान सरकार ने बिना किसी भेदभाव के 65 लाख गरीबों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं।

लखनऊ को मिली 413 करोड़ रुपये की सौगात
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ’ अभियान के तहत नगर निगम की 413 करोड़ रुपये की लागत वाली 342 जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इससे पहले लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान कराए गए विकास कार्यों का पूरा ब्योरा मंच से जनता और मुख्यमंत्री के सामने रखा।

नगर विकास मंत्री ने भी साधा निशाना
समारोह को संबोधित करते हुए नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने भी पूर्व की सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले केंद्र की मोदी सरकार उत्तर प्रदेश के विकास के लिए पैसा देना चाहती थी, लेकिन तब की राज्य सरकार राजनीति के चक्कर में धन लेने को तैयार ही नहीं थी।

उन्होंने बताया कि आज लखनऊ में रोजाना 2100 टन कूड़े का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है और शिवरी प्लांट से 18 लाख मीट्रिक टन पुराना कूड़ा साफ किया जा चुका है। मंत्री ने नगर निगम के ‘कान्हा उपवन’ और ‘वन डे गवर्नेंस सिस्टम’ की भी जमकर तारीफ की।

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