हरियाणा पुलिस भर्ती और CET-2 परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों को फिलहाल प्रोविजनल (अस्थायी) तौर पर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा आयोजित पुलिस भर्ती प्रक्रिया और CET-2 परीक्षा में शॉर्टलिस्टिंग के तरीके को लेकर उठा है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि चयन प्रक्रिया में अपनाई गई शॉर्टलिस्टिंग प्रणाली पारदर्शी और न्यायसंगत नहीं है, जिसके चलते योग्य उम्मीदवारों को बाहर किया जा रहा है।
हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप मौदगिल की अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की।
अदालत ने आदेश दिया कि:
याचिकाकर्ताओं को CET-2 परीक्षा में अस्थायी रूप से शामिल होने दिया जाए
लेकिन यह स्पष्ट किया गया कि इस अनुमति के आधार पर उन्हें अंतिम चयन में कोई विशेष अधिकार नहीं मिलेगा
सरकार का पक्ष क्या रहा?
हरियाणा सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि:
भर्ती प्रक्रिया के तहत शॉर्टलिस्टिंग बैचों में की जाएगी
प्रत्येक श्रेणी में विज्ञापित पदों के 10 गुना अभ्यर्थियों को नॉलेज टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा
चयन प्रक्रिया श्रेणीवार (कैटेगरी वाइज) लागू की जा रही है
सरकार ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया 30 जनवरी 2024 की अधिसूचना और पंजाब पुलिस नियम, 1934 के अनुसार अपनाई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग मामलों का हवाला दिया:
राज्य सरकार ने ‘हरियाणा लोक सेवा आयोग बनाम परमिला’ केस का हवाला दिया
वहीं याचिकाकर्ताओं ने ‘राजस्थान हाई कोर्ट बनाम रजत यादव’ मामले का संदर्भ दिया
हालांकि अदालत ने पाया कि ये मामले अलग परिस्थितियों से जुड़े हैं।
अदालत ने किन बातों को माना अहम?
हाई कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि:
याचिकाकर्ताओं ने सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं
समान मुद्दे से जुड़ा एक अन्य मामला पहले से लंबित है
इन्हीं आधारों पर अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी।
अगली सुनवाई कब?
इस मामले की अगली सुनवाई अब 2 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
उम्मीद है कि उस दिन अदालत इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला दे सकती है।
हाई कोर्ट का यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा है, जो खुद को चयन प्रक्रिया से बाहर किए जाने को लेकर संघर्ष कर रहे थे। हालांकि यह केवल अंतरिम राहत है, अंतिम निर्णय अभी बाकी है, जो भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।
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