शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून की पहली भारी बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से कई जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार राज्यभर में 35 सड़कें बंद हैं, 127 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं और कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
सबसे अधिक नुकसान लाहौल-स्पीति और चंबा जिलों में दर्ज किया गया। लाहौल-स्पीति के जिस्पा और पट्टन घाटी में बादल फटने से नालों में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और तांदी-संसारी मार्ग बाधित हो गए। वहीं चंबा जिले की कीड़ी पंचायत में बादल फटने से सेब के बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा। कीड़ी-बंजल मार्ग का करीब 500 मीटर हिस्सा बह गया, जबकि तीन पैदल पुल भी तेज बहाव में बह गए।
बारिश के कारण कई जिलों में सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ। पठानकोट-भरमौर हाईवे और चंबा-तीसा मार्ग कई घंटों तक बंद रहे, जिससे करीब 30 पंचायतों का संपर्क टूट गया। सलूणी क्षेत्र में कई घरों में मलबा घुस गया, जबकि किलाड़-सेचू मार्ग पर मलबे में एक जेसीबी मशीन दब गई। मंडी जिले में औट के पास पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। इसके अलावा कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में पंजाब से घूमने आए 21 वर्षीय पर्यटक की नाले में डूबने से जान चली गई।
लगातार बारिश का असर पूरे प्रदेश की आधारभूत सेवाओं पर भी पड़ा है। कई इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित रही। ऊना में सड़कें जलमग्न हो गईं, सब्जी मंडी का कारोबार प्रभावित हुआ और एक स्कूल परिसर में पानी भर गया। किन्नौर के रिस्पा नाले में आई बाढ़ से गांव को जोड़ने वाली सड़क बह गई, जबकि बिलासपुर-सोलन सीमा पर हुए भारी भूस्खलन के कारण शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग करीब आठ घंटे तक बंद रहा। इससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए 2 और 3 जुलाई को भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में येलो अलर्ट लागू है। विभाग के अनुसार 7 जुलाई तक प्रदेश में मौसम खराब बना रह सकता है। लोक निर्माण विभाग ने भी मानसून को देखते हुए फील्ड स्टाफ की छुट्टियां अगले आदेश तक रद्द कर दी हैं, ताकि सड़क बहाली और राहत कार्यों में किसी तरह की देरी न हो। प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और मौसम संबंधी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
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