फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में हाईटेक नकल का भंडाफोड़, पेन कैमरे और ब्लूटूथ से चल रहा था पूरा नेटवर्क

Punjab

चंडीगढ़: पंजाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 454 फार्मेसी अफसर पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 28 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह पेन कैमरे, व्हाट्सएप और ब्लूटूथ डिवाइस की मदद से परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचा रहा था। हालांकि पुलिस और विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि परीक्षा शुरू होने के बाद की गई संगठित नकल का प्रयास है।

जांच के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद फिरोजपुर के एक परीक्षा केंद्र पर बैठे एक अभ्यर्थी ने पेन कैमरे से प्रश्नपत्र की तस्वीरें खींचीं और उन्हें व्हाट्सएप के जरिए हरियाणा के भिवानी भेजा। वहां से प्रश्नपत्र राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ पहुंचा, जहां सॉल्वर टीम ने उत्तर तैयार किए। इसके बाद फरीदकोट में बनाए गए अस्थायी कंट्रोल रूम से ब्लूटूथ वायरलेस डिवाइस के जरिए रीयल टाइम में परीक्षा केंद्रों पर बैठे अभ्यर्थियों तक जवाब पहुंचाए गए।

खुफिया सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फरीदकोट के सोसायटी नगर स्थित एक घर पर छापा मारा, जहां से पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह फरीदकोट, फिरोजपुर और कोटकपूरा के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर कुल 42 अभ्यर्थियों को नकल कराने की कोशिश कर रहा था। इनमें से 28 अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया गया, जबकि 14 परीक्षा समाप्त होने से पहले ही केंद्र से निकल गए थे। पुलिस ने उनके कब्जे से 27 बैटरी संचालित वायरलेस डिवाइस भी बरामद किए हैं।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह परीक्षा पास कराने के बदले अभ्यर्थियों से 3.5 लाख रुपये से लेकर 13 लाख रुपये तक वसूलता था। कई उम्मीदवारों से पोस्ट डेटेड चेक भी लिए गए थे। पुलिस के अनुसार, फाजिल्का के संत कबीर पॉलिटेक्निक कॉलेज का एक कर्मचारी इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। मामले में कई राज्यों से जुड़े आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और फरार लोगों की तलाश जारी है।

इस बीच बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। विश्वविद्यालय के अनुसार परीक्षा में कुल 6,474 अभ्यर्थी शामिल हुए थे और सबसे पहले एक परीक्षा केंद्र पर ब्लूटूथ डिवाइस के साथ एक अभ्यर्थी पकड़ा गया था। इसके बाद पुलिस के साथ मिलकर व्यापक कार्रवाई की गई। विश्वविद्यालय ने कहा है कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट पंजाब सरकार को भेजी जाएगी और आगे की कार्रवाई सरकार के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

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