हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा, पारदर्शी प्रबंधन और अतिक्रमण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से नई लैंड एसेट मैनेजमेंट गाइडलाइंस लागू कर दी हैं। नई व्यवस्था के तहत राज्य की प्रत्येक सरकारी भूमि का अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और उसका डिजिटल डाटाबेस विकसित किया जाएगा, जिससे भूमि संबंधी जानकारी को अद्यतन और सुरक्षित रखा जा सके।
नई गाइडलाइन के अनुसार, प्रत्येक सरकारी भूखंड के लिए अलग लैंड रिकॉर्ड फाइल तैयार की जाएगी। यदि किसी विभाग या संस्थान की जमीन अलग-अलग स्थानों पर स्थित है, तो प्रत्येक स्थान के लिए अलग रिकॉर्ड रखा जाएगा। इन अभिलेखों के रखरखाव और समय-समय पर अपडेट करने की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान के प्रमुख या अधिकृत अधिकारी की होगी।
सरकार ने भूमि प्रबंधन के लिए सात प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें सरकारी भूमि के स्वामित्व और कब्जे की स्पष्ट स्थिति सुनिश्चित करना, राजस्व रिकॉर्ड को नियमित रूप से अपडेट करना, समय पर म्यूटेशन कराना, अतिक्रमण रोकना, प्रमाणित रिकॉर्ड तैयार करना, भविष्य की आधारभूत परियोजनाओं की योजना को आसान बनाना और रियल-टाइम डिजिटल रिपॉजिटरी विकसित करना शामिल है।
नई नीति के तहत सरकारी जमीनों को चार अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। इनमें विभागीय कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में अंतर वाले भूखंड, लंबित म्यूटेशन वाले मामले, सही रिकॉर्ड वाली सरकारी भूमि तथा अतिक्रमण या विवाद से जुड़ी जमीन को अलग-अलग श्रेणियों में रखकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इससे रिकॉर्ड प्रबंधन और विवादों के समाधान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।
गाइडलाइन में भूमि अधिग्रहण, राजस्व दस्तावेजों का संकलन, म्यूटेशन, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने, जीआईएस मैपिंग, भूमि सीमाओं की सुरक्षा, वार्षिक निरीक्षण और निदेशालय स्तर पर नियमित निगरानी को भी अनिवार्य बनाया गया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों और सरकारी संस्थानों को नई गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि सरकारी संपत्तियों का बेहतर संरक्षण और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
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