शिमला: हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई ‘पंचायती राज संस्थाओं’ के चुनावी शंखनाद के साथ ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प है, क्योंकि एक तरफ भाजपा के पास अपनी बढ़त बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ सत्ता में काबिज कांग्रेस के पास अपनी जमीन मजबूत करने का सुनहरा मौका।
सत्ता बनाम संगठन: किसकी होगी जीत?
वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश की 12 जिला परिषदों में से 9 पर भाजपा समर्थित अध्यक्षों का दबदबा है। विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद अब कांग्रेस की नजर इन जिला परिषदों को भाजपा मुक्त करने पर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कार्यकाल का यह पहला बड़ा स्थानीय निकाय चुनाव है, जिसे सरकार के कामकाज और लोकप्रियता के ‘लिटमस टेस्ट’ के तौर पर देखा जा रहा है।
दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
इस चुनाव में न केवल स्थानीय उम्मीदवारों की, बल्कि सुक्खू कैबिनेट के दिग्गज मंत्रियों की साख भी दांव पर लगी है:
. शिमला: यहां से तीन मंत्री (रोहित ठाकुर, अनिरुद्ध सिंह और विक्रमादित्य सिंह) आते हैं।
. हमीरपुर और ऊना: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण यहां सबकी नजरें टिकी हैं।
. अन्य जिले: धनीराम शांडिल (सोलन), जगत सिंह नेगी (किन्नौर) और चंद्र कुमार (कांगड़ा) जैसे कद्दावर नेताओं के लिए अपने क्षेत्र में कांग्रेस समर्थित
उम्मीदवारों को जीत दिलाना बड़ी जिम्मेदारी है।
निर्दलीय चेहरा, राजनीतिक दिल
पंचायती राज चुनाव सीधे पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े जाते। प्रत्याशी निर्दलीय के तौर पर उतरते हैं, लेकिन असली खेल चुनाव के बाद शुरू होता है। जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव के समय ही स्पष्ट होता है कि ‘जोड़-तोड़’ की राजनीति में कौन भारी पड़ा। भाजपा जहां अपने मजबूत कैडर के भरोसे है, वहीं कांग्रेस सत्ता के लाभ और जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर मैदान मारना चाहती है।
वर्तमान स्थिति: जिला परिषद की सियासी तस्वीर
नीचे दी गई तालिका दर्शाती है कि वर्तमान में किस जिले में किस पार्टी का वर्चस्व है:
जिला वर्तमान दबदबा (समर्थित)
.ऊना भाजपा
.मंडी भाजपा
.लाहौल-स्पीति कांग्रेस
.सिरमौर भाजपा
.कुल्लू कांग्रेस
.बिलासपुर भाजपा
.सोलन भाजपा
.कांगड़ा भाजपा
.चंबा भाजपा
.किन्नौर भाजपा
.शिमला कांग्रेस .हमीरपुर भाजपा
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
