चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने और वहां स्वच्छता के उच्च मानक स्थापित करने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। प्रदेश के 14,268 सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई की व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए आज, 29 अप्रैल को सुबह 11 बजे एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है।
स्वच्छ प्रांगण योजना: अब ज़मीनी स्तर पर दिखेगा असर
हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय द्वारा बुलाई गई इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से लेकर खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) तक सभी को शामिल किया गया है। बैठक का मुख्य केंद्र ‘स्वच्छ प्रांगण योजना’ का प्रभावी क्रियान्वयन है।
इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
. शौचालयों की नियमित सफाई: छात्र-छात्राओं के लिए स्वच्छ और क्रियाशील शौचालय सुनिश्चित करना।
. शुद्ध पेयजल: पीने के पानी के स्रोतों की स्वच्छता और उनकी उचित व्यवस्था।
. परिसर की स्वच्छता: स्कूल के खेल के मैदान और कक्षाओं में सफाई का स्तर सुधारना।
. बुनियादी ढांचा: स्कूल की अन्य मूलभूत सुविधाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा।
लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी, तय होगी जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग ने इस बार कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि स्कूलों में गंदगी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
निरीक्षण का नया ढांचा:
- जिला और ब्लॉक स्तर: अधिकारी नियमित रूप से स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे।
- राज्य स्तर: मुख्यालय द्वारा हर महीने सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग की जाएगी।
“सरकार का लक्ष्य विद्यार्थियों को एक सुरक्षित और स्वच्छ शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। बेहतर स्वच्छता से न केवल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्कूलों में उनकी उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।” – शिक्षा निदेशालय
क्यों जरूरी है यह पहल?
अक्सर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सफाई के अभाव की शिकायतें आती रहती हैं। इस बैठक के माध्यम से सरकार कमियों की पहचान कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएगी। हरियाणा सरकार का विजन सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के समकक्ष स्वच्छता मानकों पर लाना है।
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