चंडीगढ़: पंजाब में शिशु मृत्यु दर को लेकर चिंता बढ़ गई है। नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System) की महत्वपूर्ण सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 के अनुसार, राज्य में वर्ष 2024 के दौरान शिशु मृत्यु के मामलों में 17.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में जहां 2,272 शिशुओं की मौत हुई थी, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,671 पहुंच गई।
रिपोर्ट में सबसे अधिक चिंता की बात यह सामने आई है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों में शिशु मृत्यु दर कहीं अधिक है। वर्ष 2024 में ग्रामीण क्षेत्रों में 258 शिशु मौतें दर्ज की गईं, जबकि शहरों में 2,413 बच्चों की मौत हुई। यानी राज्य में दर्ज कुल शिशु मृत्यु के लगभग 90 प्रतिशत मामले शहरी क्षेत्रों से सामने आए हैं।
जिलावार आंकड़ों में अमृतसर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां वर्ष 2024 में 835 शिशुओं की मौत दर्ज की गई। इसके बाद जालंधर (368), लुधियाना (348) और पटियाला (331) का स्थान रहा। स्वास्थ्य विभाग ने इन जिलों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती बढ़ाने और जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले प्रसव, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण, गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त देखभाल का अभाव, कुपोषण, स्वच्छता की कमी और दस्त जैसी बीमारियां शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रसवपूर्व देखभाल में सुधार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, पोषण कार्यक्रमों और संक्रमण रोकथाम पर विशेष कार्य कर रहा है। साथ ही जिला अस्पतालों, उपमंडल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति भी की जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां पंजाब में शिशु मृत्यु दर बढ़ी है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है। देशभर में वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में शिशु मृत्यु के मामलों में 17.12 प्रतिशत की कमी आई है। ऐसे में पंजाब के लिए यह रिपोर्ट स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
