चंडीगढ़: केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने ‘सतलुज’ फिल्म को लेकर जारी विवाद के बीच श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए अरदास की जानी चाहिए। बिट्टू ने इस मुद्दे को किसी एक वर्ग या समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे पंजाब और पंजाबियत से जुड़ा विषय बताया।
रवनीत बिट्टू ने कहा कि 1990 के दशक में पंजाब ने हिंसा और आतंकवाद का ऐसा दौर देखा, जिसमें हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई। उनके अनुसार उस समय बहा खून केवल आतंकवादियों, पुलिसकर्मियों या निर्दोष नागरिकों का नहीं था, बल्कि वह पूरे पंजाब का खून था। उन्होंने कहा कि हथियारबंद हों या निहत्थे, वर्दी में हों या आम नागरिक, मरने वाले सभी पंजाबी थे।
केंद्रीय मंत्री ने जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज से आग्रह किया कि श्री अकाल तख्त साहिब में होने वाली अरदास के दौरान उन सभी लोगों को याद किया जाए जिन्होंने हिंसा के उस दौर में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि आज भी उन हजारों परिवारों और आत्माओं को न्याय और सम्मान की प्रतीक्षा है, जिन्हें इतिहास के कठिन दौर ने गहरा दर्द दिया।
बिट्टू ने अपने बयान में कहा कि यह समय किसी समुदाय विशेष की बात करने का नहीं, बल्कि पूरे पंजाब की पीड़ा को स्वीकार करने का है। उन्होंने कहा कि गोली चलाने वाला भी पंजाबी था, गोली खाने वाला भी पंजाबी था और हिंसा का सबसे बड़ा नुकसान भी पंजाब ने ही झेला। इसलिए सभी पीड़ितों को समान सम्मान और श्रद्धांजलि मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नफरत से अतीत के घाव कभी नहीं भर सकते। समाज को शांति, भाईचारे और मेल-मिलाप के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। बिट्टू ने उम्मीद जताई कि जत्थेदार की ओर से की जाने वाली अरदास उन परिवारों और आत्माओं के लिए मरहम का काम करेगी, जिन्होंने पंजाब के सबसे कठिन दौर का दर्द सहा।
गौरतलब है कि ‘सतलुज’ फिल्म को लेकर पंजाब में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। फिल्म की विषयवस्तु, उसमें किए गए दावों और ऐतिहासिक घटनाओं के चित्रण को लेकर राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर बहस जारी है। इसी बीच रवनीत बिट्टू का यह बयान पंजाब में चल रही चर्चा को नया आयाम देता है।
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