दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति-2026 के तहत अब सरकारी सब्सिडी केवल उन्हीं इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगी, जिनमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम (Regenerative Braking System) उपलब्ध होगा। सरकार ने इस तकनीक को सभी पात्र ईवी श्रेणियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। अब तक यह सुविधा मुख्य रूप से प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनों में देखने को मिलती थी, लेकिन नई नीति लागू होने के बाद सब्सिडी का लाभ लेने के लिए इसका होना जरूरी होगा।
परिवहन विभाग के अनुसार, नई नीति का उद्देश्य सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बेहतर तकनीक, अधिक ऊर्जा दक्षता और लंबी ड्राइविंग रेंज वाले वाहनों को बढ़ावा देना है। इसी वजह से रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम को अनिवार्य तकनीकी मानकों में शामिल किया गया है। जिन वाहनों में यह तकनीक नहीं होगी, वे सरकारी खरीद प्रोत्साहन (सब्सिडी) के पात्र नहीं माने जाएंगे।
नई व्यवस्था इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (यात्री) और एन-1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर मालवाहक वाहनों पर लागू होगी। इसके साथ ही सरकार ने बैटरी की गुणवत्ता, न्यूनतम ड्राइविंग रेंज, ऊर्जा खपत और वारंटी से जुड़े मानकों को भी अनिवार्य किया है। इन तकनीकी शर्तों का पालन करने वाले वाहनों को ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
नीति के तहत प्रत्येक इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल की जांच के लिए मॉडल अप्रूवल कमेटी का गठन किया गया है। यह समिति केवल उन्हीं मॉडलों को मंजूरी देगी, जो सभी निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करेंगे। वाहन निर्माता कंपनियों (OEMs) को आवेदन के समय यह प्रमाणित करना होगा कि उनके मॉडल में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम मौजूद है। यदि स्वीकृति के बाद किसी मॉडल में तकनीकी बदलाव किया जाता है या कोई अनिवार्य फीचर हटाया जाता है, तो उसे दोबारा मंजूरी लेनी होगी।
क्या है रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम और क्यों है फायदेमंद?
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम ऐसी तकनीक है, जो ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को व्यर्थ नहीं जाने देती। यह ऊर्जा दोबारा बिजली में बदलकर वाहन की बैटरी में भेजी जाती है, जिससे बैटरी आंशिक रूप से चार्ज होती रहती है। इसका फायदा यह है कि वाहन एक बार चार्ज करने पर अधिक दूरी तय कर सकता है, बैटरी की दक्षता बढ़ती है और बार-बार चार्जिंग की जरूरत कम पड़ती है।
नई EV नीति के प्रमुख तकनीकी मानक
नई नीति के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया और यात्री तिपहिया वाहनों के लिए न्यूनतम 80 किलोमीटर की प्रमाणित ड्राइविंग रेंज और 40 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति अनिवार्य होगी। वहीं, इलेक्ट्रिक चारपहिया मालवाहक (N-1 श्रेणी) वाहनों के लिए कम से कम 100 किलोमीटर की ड्राइविंग रेंज और 50 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति निर्धारित की गई है। इसके अलावा सभी पात्र वाहनों के लिए रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम और कम से कम तीन साल की वारंटी अनिवार्य शर्त होगी।
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