अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते आर्थिक देशों के समूह ‘ब्रिक्स’ के शिखर सम्मेलन में इस बार भारत के राज्य उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन ढांचे (Disaster Management Model) की विशेष चर्चा हुई। सम्मेलन में वैश्विक विशेषज्ञों ने इस बात को माना कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों के बावजूद उत्तराखंड ने जिस प्रकार अत्याधुनिक तकनीक और मैन्युअल ‘रैट-माइनिंग’ के अनूठे तालमेल से 41 मजदूरों की जान बचाई, वह दुनिया भर के देशों के लिए एक केस स्टडी (Case Study) है।
पीएम मोदी का कुशल मार्गदर्शन और त्वरित फैसले
देहरादून में मीडिया कर्मियों से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिल्कयारा अभियान की सफलता सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और पल-पल की मॉनिटरिंग का परिणाम थी। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने टनल साइट पर देश-विदेश की सबसे बेहतरीन मशीनों (जैसे ऑगर मशीन) और वर्टिकल ड्रिलिंग की व्यवस्था को तुरंत हरी झंडी दी थी। संकट के उन 17 दिनों में प्रधानमंत्री लगातार राज्य सरकार के संपर्क में रहे और अंदर फंसे श्रमिकों का हौसला टूटने नहीं दिया।
वैज्ञानिकों से लेकर रैट माइनर्स तक, सभी असली हकदार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को ‘सामूहिक शक्ति और अटूट विश्वास’ का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक सराहना और बधाई के असली हकदार वे लोग हैं जिन्होंने जमीन पर पसीना बहाया:
एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), सेना और स्थानीय पुलिस बल। देश और दुनिया के जाने-माने भू-वैज्ञानिक, टनलिंग एक्सपर्ट और इंजीनियर। अंतिम क्षणों में जब मशीनें फेल हो गईं, तब अपने हाथों से मलबे को साफ करने वाले जांबाज रैट माइनर्स। केंद्र व राज्य सरकार के तमाम अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि जो लगातार मौके पर डटे रहे।
भविष्य के लिए रोल मॉडल बना उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में मिली यह पहचान उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के मनोबल को और बढ़ाएगी। राज्य सरकार अब अपने बुनियादी ढांचे के निर्माण में और अधिक सतर्कता और आपदा-रोधी (Disaster Resilient) तकनीकों का समावेश कर रही है, ताकि ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को सुरक्षित और सुदृढ़ तरीके से पूरा किया जा सके।
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