उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में सामने आए पेपर लीक मामले का दायरा अब बढ़ता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय की शिकायत के अनुसार, जिस सहायक प्रोफेसर पर प्रश्नपत्र लीक करने का आरोप है, उसने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी विषय का प्रश्नपत्र भी तैयार किया था। इसी आशंका के चलते विश्वविद्यालय ने इस विषय की परीक्षा भी रद्द कर दी है। मामले ने विश्वविद्यालय की गोपनीय परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यूटीयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी.के. पटेल द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी का प्रश्नपत्र भी तैयार किया था। ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह होने के कारण विश्वविद्यालय ने एहतियातन इस परीक्षा को भी निरस्त कर दिया है। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि पूरे मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता हो सकती है, जिसकी जांच की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए संबद्ध सभी संस्थानों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। यूटीयू की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने कहा कि पात्र विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया कई स्तरों पर गोपनीय तरीके से संचालित होती है। पहले विश्वविद्यालय स्तर पर समन्वयक और जिला समन्वयक नियुक्त किए जाते हैं, फिर संबद्ध कॉलेजों के योग्य शिक्षकों की सूची से प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षक का चयन किया जाता है। इस प्रक्रिया की गोपनीयता इतनी कड़ी होती है कि संबंधित शिक्षक के संस्थान तक को इसकी जानकारी नहीं होती। इसके बावजूद प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गोपनीय चयन प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है। डिजिटल सुरक्षा, डेटा मॉनिटरिंग और जवाबदेही की व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। विश्वविद्यालय की ओर से प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों को स्टेशनरी नष्ट करने, डिजिटल कॉपी भेजने के बाद ईमेल ट्रेल हटाने और पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखने के सख्त निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन हालिया घटना ने इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और विश्वविद्यालय ने संकेत दिए हैं कि जांच के आधार पर यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस बीच छात्रों और अभिभावकों की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।
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