उत्तराखंड की यात्रा पर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए मौसम विभाग ने एक बेहद जरूरी अलर्ट जारी किया है। राज्य में चिलचिलाती गर्मी के बीच एक बार फिर मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के मुताबिक, प्रदेश में अगले 4 से 5 दिनों तक मौसम का रुख कड़ा रहेगा और कई इलाकों में तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश देखने को मिल सकती है।
आज से बदलेगा मिजाज: कुमाऊं और गढ़वाल में बारिश के आसार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मौसम के बदलने का सिलसिला आज यानी 1 जून से ही शुरू हो जाएगा, जिससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी। आज कुमाऊं मंडल के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है।कुमाऊं के साथ-साथ गढ़वाल मंडल के भी कुछ हिस्सों में झमाझम बारिश होने के आसार हैं, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।
2 से 5 जून तक पूरे प्रदेश में रहेगा मौसम का तांडव
वैज्ञानिक रोहित थपलियाल ने बताया कि यह मौसमी बदलाव सिर्फ एक दिन के लिए नहीं है, बल्कि आगामी 5 जून तक इसका असर पूरे राज्य में दिखाई देगा। मैदान से पहाड़ तक बौछारें: 2 जून से लेकर 5 जून के बीच उत्तराखंड के पर्वतीय (Hill Stations) और मैदानी दोनों क्षेत्रों में छिटपुट और मध्यम बारिश का दौर लगातार जारी रहेगा। तेज हवाओं का कहर: इस दौरान मैदानी इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं (Gushy Winds) चलने की आशंका है, जिससे पेड़ और साइनबोर्ड गिरने का खतरा बढ़ जाता है। आसमानी बिजली और थंडरस्टॉर्म का खतरा, यात्रियों को विशेष सलाह मौसम केंद्र ने इस 5 दिनों के स्पेल (Spell) के दौरान सबसे ज्यादा खतरा आकाशीय बिजली (Lightning) और तीव्र गर्जना को लेकर जताया है। हाई अलर्ट पर पर्वतीय इलाके: उत्तराखंड के ऊंचाई वाले और पर्वतीय क्षेत्रों में थंडरस्टॉर्म (अंधड़) और लाइटनिंग की गतिविधियां बहुत ज्यादा सक्रिय रह सकती हैं।
चारधाम यात्रियों के लिए एडवाइजरी:
मौसम विभाग ने चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) पर आए तीर्थयात्रियों और अन्य पहाड़ी रास्तों पर सफर कर रहे पर्यटकों को बेहद सावधानी बरतने को कहा है। खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रुकने और आंधी-तूफान के समय पेड़ों या कच्चे मकानों के नीचे न खड़े होने की अपील की गई है। प्रशासन को भी इस अलर्ट के बाद संवेदनशील रूटों पर मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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