चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के मसौदे को लेकर शहर में विरोध तेज हो गया है। अब तक स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष 200 से अधिक आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें सबसे ज्यादा विरोध प्रस्तावित वर्टिकल ग्रोथ और हाईराइज इमारतों को लेकर सामने आया है।
‘हेरिटेज शहर की पहचान से समझौता नहीं’ — लोगों की आपत्ति
शहरवासियों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि चंडीगढ़ की असली पहचान उसकी खुली, सुनियोजित और कम घनत्व वाली हेरिटेज बसावट है। ऐसे में ऊंची इमारतों की अनुमति देने से शहर का मूल स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।
आपत्तिकर्ताओं ने स्पष्ट कहा है कि मास्टर प्लान में किसी भी तरह का बदलाव चंडीगढ़ के हेरिटेज चरित्र से छेड़छाड़ माना जाएगा, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बुनियादी ढांचे पर बढ़ेगा दबाव
कर्नल गुरसेवक सिंह (सेवानिवृत्त) सहित कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा सीवरेज, ड्रेनेज और जलापूर्ति प्रणाली पहले से ही दबाव में है।
उनका कहना है कि यदि बिना इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किए वर्टिकल ग्रोथ लागू की गई, तो शहर की मूलभूत सुविधाएं चरमरा सकती हैं और जनसंख्या दबाव असहनीय हो जाएगा।
ट्रैफिक और सुविधाओं पर संकट की आशंका
आपत्तियों में यह भी कहा गया है कि हाईराइज इमारतों के कारण जनसंख्या घनत्व तेजी से बढ़ेगा, जिससे ट्रैफिक, पानी, बिजली और पार्किंग व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ेगा।
लोगों का तर्क है कि चंडीगढ़ की योजना पहले से ही संतुलित है और इसे बनाए रखना ही शहर के भविष्य के लिए जरूरी है।
स्क्रीनिंग कमेटी ने सुनीं आपत्तियां
मास्टर प्लान पर गठित स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख प्रेरणा पुरी और उनकी टीम ने दो सत्रों में लोगों की आपत्तियां सुनीं। कमेटी के समक्ष कई लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र की स्थानीय समस्याएं भी रखीं, जिनमें पार्किंग, डिपो क्लीयरेंस और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
कमेटी ने संबंधित मामलों को समझते हुए समाधान का आश्वासन दिया है।
उद्योग और व्यापार जगत भी देगा सुझाव
शुक्रवार को चंडीगढ़ के उद्यमी और व्यापार मंडल के प्रतिनिधि भी स्क्रीनिंग कमेटी से मुलाकात करेंगे। वे मास्टर प्लान से जुड़े अपने सुझाव और आपत्तियां रखेंगे।
उद्यमियों की मांगों में MSME एक्ट का पूर्ण क्रियान्वयन, उद्योगों में सरलीकरण, FAR में वृद्धि और बिना उद्योग तोड़े नए प्रावधान शामिल हैं। वहीं व्यापार मंडल बूथों पर अतिरिक्त फ्लोर और अन्य विकासात्मक बदलावों की मांग करेगा।
निष्कर्ष: ‘विकास बनाम विरासत’ की बहस तेज
मास्टर प्लान-2031 को लेकर चंडीगढ़ में अब बहस विकास बनाम हेरिटेज संरक्षण के मुद्दे पर केंद्रित हो गई है। जहां प्रशासन विकास और बढ़ती जरूरतों की बात कर रहा है, वहीं बड़ी संख्या में नागरिक शहर की ऐतिहासिक और योजनाबद्ध पहचान को बनाए रखने की मांग पर अड़े हुए हैं।
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