पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फैसलों को लेकर जारी अंदरूनी खींचतान अभी थमती नजर नहीं आ रही है। पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी के बीच प्रियंका गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से फोन पर बातचीत की। इसके बाद चन्नी ने अपने समर्थक नेताओं की बैठक बुलाने का फैसला किया, जिससे राज्य की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।
इधर, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश में जुट गए हैं। वह पूर्व मंत्री ब्रह्म महेंद्र से मुलाकात करने पहुंचे। बघेल ने स्पष्ट किया कि पार्टी हाईकमान नेतृत्व और चुनावी समितियों से जुड़े अपने फैसलों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन सभी असंतुष्ट नेताओं को जल्द ही साथ लेकर चलने का प्रयास किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, चन्नी समर्थकों की मांग है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए। वहीं बागी नेताओं को हाईकमान से मिलने का समय मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है, जिससे विवाद के समाधान की संभावना बनी हुई है।
भूपेश बघेल के सख्त रुख के बाद बागी नेताओं पर दबाव बढ़ गया है। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि यदि कोई नेता हाईकमान के फैसलों का सार्वजनिक रूप से विरोध करता है, तो उसे संगठन और विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे पहले भी पार्टी नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं को एकजुट रहने की नसीहत दे चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस पर परिवारवाद और अंदरूनी लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से पंजाब की भावनाओं के साथ न्याय नहीं कर पाई है। हालांकि कांग्रेस की ओर से फिलहाल सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिशें जारी
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