हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
Punjab and Haryana High Court में वकीलों के कार्य बहिष्कार पर मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) ने कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने साफ कहा कि जब मामले पर पहले ही स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, तो हड़ताल करने की जरूरत नहीं थी।
मामला क्या है?
यह पूरा विवाद पूर्व बार सचिव गगनदीप सिंह जम्मू पर हुए हमले से जुड़ा है। हमले के विरोध में वकीलों ने दोपहर बाद कार्य बहिष्कार किया था, जिसके चलते अदालत की कार्यवाही प्रभावित हुई।
कोर्ट की नाराजगी की वजह
अदालत ने कहा कि:
- जब कोर्ट पहले ही संज्ञान ले चुका है
- और आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं
- तो कार्य बहिष्कार का कोई औचित्य नहीं बनता
चीफ जस्टिस ने सवाल उठाया कि न्यायिक प्रक्रिया के बीच इस तरह की हड़ताल से कामकाज प्रभावित क्यों किया गया।
बार एसोसिएशन का पक्ष
Punjab and Haryana High Court Bar Association के प्रधान ने कोर्ट को बताया कि यह कदम केवल प्रतीकात्मक था।
उन्होंने कहा कि:
- वकीलों में घटना को लेकर भारी आक्रोश था
- अदालत के आदेशों का सम्मान किया जा रहा है
- और कल से सभी वकील नियमित काम पर लौट आएंगे
गगनदीप सिंह जम्मू का मामला
अदालत ने इस दौरान गगनदीप सिंह जम्मू को भी कोर्ट में उपस्थित होने के लिए बुलाया, ताकि मामले की गंभीरता को समझा जा सके और आगे की कार्रवाई तय हो सके।
यह मामला न्याय व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन के बीच संतुलन को लेकर एक अहम सवाल खड़ा करता है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान हड़ताल जैसी गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं, खासकर जब अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी हो।
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