जलभराव से निपटने के लिए दिल्ली सरकार की बड़ी पहल
राजधानी दिल्ली में हर वर्ष मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में तैयार किए गए ड्रेनेज मास्टर प्लान को अब तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है। सरकार ने नालों के निर्माण और रीमॉडलिंग कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए आधुनिक प्री-कास्ट तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने राजधानी के संवेदनशील और जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्य हेतु टेंडर भी जारी कर दिए हैं।
क्या है प्री-कास्ट तकनीक?
पारंपरिक निर्माण पद्धति में नालों का निर्माण मौके पर कंक्रीट डालकर किया जाता है, जिसमें काफी समय लगता है। वहीं प्री-कास्ट तकनीक में नालों के लिए आवश्यक कंक्रीट बॉक्स पहले से फैक्टरी या यार्ड में तैयार किए जाते हैं। इसके बाद निर्माण स्थल पर केवल खुदाई कर इन तैयार बॉक्सों को क्रेन की सहायता से जोड़ दिया जाता है। इससे निर्माण कार्य की गति कई गुना बढ़ जाती है और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।
गुजरात मॉडल पर काम करेगी दिल्ली
दिल्ली सरकार इस परियोजना में गुजरात मॉडल का अनुसरण कर रही है। गुजरात के कई शहरों में वर्षों से प्री-कास्ट कंक्रीट तकनीक के जरिए आधुनिक जल निकासी व्यवस्था संचालित की जा रही है। समय पर कार्य पूरा करने के लिए शुरुआती चरण में इन विशेष प्री-कास्ट कंक्रीट बॉक्सों को गुजरात से मंगवाया जाएगा, ताकि मानसून से पहले महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की जा सकें।
प्री-कास्ट तकनीक के चार बड़े फायदे
पारंपरिक तकनीक में कंक्रीट डालने और उसे मजबूत होने में कई सप्ताह लगते हैं, जबकि प्री-कास्ट तकनीक से निर्माण कार्य कुछ दिनों में पूरा किया जा सकता है।
निर्माण स्थल पर भारी मात्रा में निर्माण सामग्री जमा नहीं करनी पड़ेगी, जिससे धूल प्रदूषण कम होगा और सड़क पर ट्रैफिक बाधित नहीं होगा।
फैक्टरी में नियंत्रित वातावरण में तैयार होने वाले प्री-कास्ट बॉक्स अधिक मजबूत, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं।
विशेष डिजाइन वाले कंक्रीट बॉक्स बारिश के पानी की तेज निकासी सुनिश्चित करेंगे, जिससे जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि जलभराव वाले प्रमुख क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम को मानसून से पहले मजबूत किया जाए। इससे राजधानी के निवासियों को बरसात के दौरान राहत मिलेगी और सड़कों पर जलभराव से होने वाली परेशानियां कम होंगी। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था को दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान मिल सकेगा।
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