शिमला: हिमाचल प्रदेश की बहुप्रतीक्षित किशाऊ बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना को लेकर जल्द ही बड़ा फैसला होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बताया कि केंद्र सरकार, साझेदार राज्यों और भारत सरकार के बीच परियोजना के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने एमओयू का प्रारूप राज्यों को भेजकर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना को केवल उन्हीं शर्तों पर आगे बढ़ाया जाए, जिनसे प्रदेश के दीर्घकालिक हित पूरी तरह सुरक्षित रहें। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई बैठकों में परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर सहमति बन चुकी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना में कोई पूंजीगत निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को हर वर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार ने पूर्व में प्रस्तावित एमओयू के मसौदे को स्वीकार नहीं किया था और संशोधित शर्तों के माध्यम से हिमाचल के हितों को सुरक्षित कराया है।
सुक्खू ने बताया कि संशोधित समझौते के अनुसार सभी साझेदार राज्यों को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा। साथ ही हिमाचल प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप जलाशय से पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर पानी पर हिमाचल प्रदेश का अधिकार भी इस नई व्यवस्था में सुरक्षित रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के प्रयासों से पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा वित्तीय गतिरोध समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमत थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसका विरोध करते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की, जिसमें बिना किसी पूंजीगत निवेश के प्रदेश को उसके सभी वैध लाभ मिल सकें।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये की वसूली के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों पर हिमाचल के अधिकारों की रक्षा करना और उनसे अधिकतम आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना है।
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