हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम वाले स्कूलों में चल रही शिक्षकों की कमी और नियुक्ति का विवाद अगले 10 दिनों के भीतर पूरी तरह सुलझने जा रहा है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति (Cabinet Sub-Committee) इस संवेदनशील मामले पर अंतिम मुहर लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगले दो दिनों के भीतर सचिवालय में इस उच्च स्तरीय कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसके बाद तैयार रिपोर्ट को तुरंत सरकार के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
डिप्टी CM की अध्यक्षता में बनी हाई-लेवल कमेटी
शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े हर कानूनी और प्रशासनिक पहलू को बारीकी से देखने के लिए सरकार ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। इस विशेष कमेटी में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के साथ-साथ प्रदेश के तीन बड़े मंत्रियों को शामिल किया गया है: जगत सिंह नेगी (राजस्व मंत्री) रोहित ठाकुर (शिक्षा मंत्री) राजेश धर्माणी (तकनीकी शिक्षा मंत्री)
कमेटी की यही फाइनल रिपोर्ट तय करेगी कि इन चुनिंदा सीबीएसई स्कूलों में किन शिक्षकों की तैनाती की जाएगी और भविष्य में चयन की क्या प्रक्रिया रहेगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में 150 सीबीएसई पाठ्यक्रम स्कूलों को पूरी तरह संचालित करने की घोषणा की थी।
परीक्षा और मेरिट के बाद अटकी थी काउंसलिंग, अब बढ़ेगी रफ्तार
सरकार की योजना पहले से ही प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में सेवाएं दे रहे बेहतरीन 5,623 शिक्षकों को इन सीबीएसई स्कूलों में तैनात करने की थी। इसके लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई गई थी: स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के माध्यम से ली गई परीक्षा में कुल 9,821 शिक्षक शामिल हुए थे।परीक्षा के बाद 6,084 शिक्षक मेरिट लिस्ट में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे।
काउंसलिंग प्रक्रिया: शिक्षा निदेशालय ने मेरिट में आए शिक्षकों की काउंसलिंग के लिए मई महीने में शेड्यूल भी जारी कर दिया था। इसके तहत 147 प्रिंसिपलों की काउंसलिंग पूरी कर मेरिट के आधार पर उन्हें स्कूल भी आवंटित कर दिए गए थे, लेकिन बाकी शिक्षकों की प्रक्रिया अभी रुकी हुई थी जो अब 10 दिन में बहाल हो जाएगी।
CBSE पैटर्न लागू होते ही सरकारी स्कूलों की तरफ मुड़े छात्र
शिक्षा निदेशालय से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद उत्साहजनक हैं। जैसे ही सरकार ने इन स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ने की घोषणा की, सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में भारी उछाल देखने को मिला। सत्र 2025-26 में जहां इन स्कूलों में 78,474 विद्यार्थी पढ़ रहे थे, वहीं नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 82,717 हो गई है, यानी सीधे तौर पर 4,243 नए बच्चों ने सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है। छात्रों की इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार अब बिना किसी देरी के 10 दिनों के भीतर शिक्षकों की नियुक्ति कर देना चाहती है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।
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