कड़े सुरक्षा घेरे में हुआ मेडिकल परीक्षण
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौजरानी अग्निकांड मामले में दिल्ली पुलिस ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार सुबह पुलिस की एक विशेष टीम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गिरफ्तार दोनों आरोपितों—लवकेश बजाज और केशव नेगी को लेकर मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल पहुंची।
अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार के जन-आक्रोश या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने दोनों आरोपितों को चारों तरफ से घेर रखा था। मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को आगे की रिमांड और कानूनी कार्रवाई के लिए कोर्ट के समक्ष पेश किया जा रहा है।
क्या हुआ था 4 जून की काली रात को?
बीते 4 जून को हौजरानी इलाके में स्थित अवैध रूप से संचालित हो रहे ‘फ्लोरिस स्टे’ बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) होटल में अचानक भीषण आग लग गई थी। रिहायशी और संकरे इलाके में स्थित इस इमारत में आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में 21 निर्दोष लोगों की असमय मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका इलाज अभी भी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
शेफ केशव नेगी की खतरनाक लापरवाही का खुलासा
पुलिस जांच में इस अग्निकांड को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनहीन सच सामने आया है। होटल के शेफ केशव नेगी की भूमिका ने इस त्रासदी को और अधिक भयानक बना दिया शटर गिराकर भागा शेफ पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब बेसमेंट में आग लगी, तो शेफ केशव नेगी ने वहां मौजूद मेहमानों और स्टाफ को सचेत करने या बाहर निकालने में मदद करने के बजाय, खुद को बचाने के लिए बेसमेंट का मुख्य शटर नीचे गिरा दिया।
चेतावनी न देना पड़ा भारी: केशव बिना किसी को कोई चेतावनी दिए चुपचाप मौके से भाग निकला। शटर गिर जाने के कारण अंदर मौजूद लोगों का निकास मार्ग (Exit) पूरी तरह बंद हो गया और वे जहरीले धुएं व आग की लपटों के बीच अंदर ही फंस गए, जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में मौतें हुईं।
अवैध रूप से चल रहा था ‘फ्लोरिस स्टे’
मामले का मुख्य आरोपित और ‘फ्लोरिस स्टे’ का मालिक लवकेश बजाज है, जिसे पुलिस ने हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर दबोच लिया था। जांच में पता चला है कि यह कमर्शियल गतिविधि पूरी तरह अवैध रूप से चलाई जा रही थी। इमारत में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। न तो वहां फायर एक्स्टिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) काम कर रहे थे और न ही आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की कोई व्यवस्था थी। नगर निगम और दमकल विभाग से अनिवार्य एनओसी (NOC) को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
जांच के घेरे में अभी और भी कई चेहरे
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की जांच केवल इन दो गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहने वाली है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि घनी आबादी वाले हौजरानी क्षेत्र में इतने समय से यह अवैध होटल किसकी शह पर चल रहा था। स्थानीय प्रशासन, नगर निगम (MCD) और अन्य संबंधित विभागों के कुछ अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं, जिन्होंने इस अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर अपनी आंखें मूंद रखी थीं। पुलिस का कहना है कि लापरवाही बरतने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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