हिमाचल पंचायत चुनाव: तीन चरणों में 3700 से अधिक पंचायतों में मतदान, चुनावी तैयारियां पूरी

Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और जिलों में चुनाव सामग्री भेजने का कार्य भी संपन्न हो चुका है।

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 26 मई को 1280 पंचायतों, 28 मई को 1258 पंचायतों और 30 मई को 1170 पंचायतों में मतदान कराया जाएगा। प्रदेशभर की 3700 से अधिक पंचायतों में चुनाव प्रक्रिया पूरी की जानी है।

कई पंचायतों में निर्विरोध चुने गए प्रतिनिधि

इस बार कई पंचायतों में मतदान से पहले ही परिणाम सामने आ गए हैं। प्रदेश की 131 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर प्रधान, उपप्रधान और पंचायत समिति सदस्य (बीडीसी) पदों पर उम्मीदवार बिना मुकाबले निर्वाचित हुए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई पंचायतों में आपसी सहमति और सर्वसम्मति के आधार पर उम्मीदवारों के चयन को प्राथमिकता दी गई, जिसके चलते मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।

गांव-गांव तेज हुआ चुनाव प्रचार

पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रत्याशी गांव-गांव जाकर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।

प्रदेशभर में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। गांवों और कस्बों में चुनावी चर्चाएं तेज हैं और मतदाताओं में भी चुनाव को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

जिला परिषद चुनाव में भाजपा-कांग्रेस की पूरी ताकत

नगर निकाय चुनावों के बाद अब जिला परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। प्रदेश की 251 जिला परिषद सीटों पर कांग्रेस और भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी हैं।

भाजपा ने अपने समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी कर संगठन को सक्रिय कर दिया है, जबकि कांग्रेस स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर रही है। दोनों दल ग्रामीण क्षेत्रों में जनाधार मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।

मनरेगा स्टाफ की भी लग सकती है चुनाव ड्यूटी

पंचायत चुनावों के बीच प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा स्टाफ को चुनावी ड्यूटी से राहत देने का फैसला वापस ले लिया है। अब बीडीओ को आवश्यकता अनुसार ग्राम रोजगार सेवकों और अन्य मनरेगा कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लगाने का अधिकार दिया गया है।

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

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