ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से दिल्ली-एनसीआर में बढ़ सकती हैं मुश्किलें
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर दिल्ली-एनसीआर में आज से तीन दिवसीय ट्रांसपोर्ट हड़ताल शुरू हो गई है। 23 मई तक चलने वाली इस हड़ताल का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ सकता है।
हड़ताल के चलते दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर सब्जी, दूध, दवा और अन्य जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
हरित शुल्क और बीएस-4 प्रतिबंध के विरोध में आंदोलन
ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि दिल्ली में व्यावसायिक वाहनों पर बढ़ाए गए हरित शुल्क और बीएस-4 वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध के विरोध में यह आंदोलन किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि देशभर के 126 परिवहन संगठन इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं।
ट्रांसपोर्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। उनका कहना है कि हड़ताल के दौरान वाहन जहां होंगे, वहीं खड़े कर दिए जाएंगे।
रोजाना हजारों वाहनों का संचालन हो सकता है प्रभावित
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस हड़ताल से प्रतिदिन 25 से 30 हजार व्यावसायिक वाहनों का संचालन प्रभावित हो सकता है। इनमें 7 से 10 हजार वाहन खाद्य सामग्री, डेयरी उत्पाद और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करते हैं।
यदि हड़ताल पूरी तरह सफल रही तो इसका असर मंडियों से लेकर खुदरा बाजार तक दिखाई दे सकता है। कई क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई धीमी पड़ने और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है।
ट्रांसपोर्टरों ने लगाए मनमाने फैसलों के आरोप
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि बिना वैज्ञानिक आधार के बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबार पर गंभीर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि हरित शुल्क में लगातार बढ़ोतरी के कारण माल ढुलाई की लागत तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर व्यापार और आम जनता पर पड़ रहा है।
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