इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले सिंडिकेट के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पूर्वी दिल्ली के मधु विहार इलाके में चल रहे एक हाईप्रोफाइल सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स/एटीएस (ATS) की टीम ने तीन शातिर सटोरियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और सट्टेबाजी का पूरा लेखा-जोखा बरामद किया ह
पुख्ता जानकारी के बाद एटीएस की टीम ने मारा छापा
पूर्वी दिल्ली के जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) राजीव कुमार ने बताया कि आईपीएल सीजन के दौरान सट्टेबाजों पर नकेल कसने के लिए पुलिस लगातार अलर्ट मोड पर है। इसी कड़ी में एसीपी पवन कुमार की निगरानी और इंस्पेक्टर आनंद सिंह के नेतृत्व में एएसआई राजीव कुमार की एक विशेष टीम गठित की गई थी। 23 मई की शाम करीब 6 बजे एटीएस टीम को एक पुख्ता खुफिया जानकारी मिली कि मधु विहार स्थित एक रिहायशी मकान के अंदर बड़े पैमाने पर आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए बताए गए ठिकाने पर छापेमारी कर दी।
ऐप के जरिए लग रहा था लाखों का दांव, 3 गिरफ्तार
जब पुलिस ने मकान में दबिश दी, तो वहां हड़कंप मच गया। आरोपी उस वक्त आईपीएल के ‘लखनऊ’ और ‘पंजाब किंग्स’ के बीच चल रहे बेहद रोमांचक मुकाबले पर लाखों रुपये का दांव लगवा रहे थे। जांच में सामने आया कि ये तीनों आरोपी एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन (App) के जरिए इस पूरे सट्टेबाजी नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस ने मौके से तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जिनकी पहचान मनीष जैन, अभिषेक जैन और अर्पित गुप्ता के रूप में हुई है।
डिजिटल गैजेट्स और सट्टे के हस्तलिखित रिकॉर्ड बरामद
पुलिस ने सट्टेबाजी के इस ठिकाने से सट्टे में इस्तेमाल होने वाले कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
2 आधुनिक लैपटॉप और 2 डिजिटल टैबलेट
9 स्मार्टफोन (मोबाइल फोन) जिनका इस्तेमाल ग्राहकों से संपर्क करने और दांव लगाने के लिए हो रहा था।
सट्टेबाजी के हस्तलिखित रिकॉर्ड (डायरी) जिसमें लाखों रुपये के लेनदेन का पूरा हिसाब-किताब दर्ज है।
पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ दिल्ली के मधु विहार थाने में ‘दिल्ली पब्लिक गैंबलिंग एक्ट’ (Delhi Public Gambling Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इन आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप के डेटा को खंगाल रही है ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य बड़े सटोरियों और उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
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