देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना ‘मिशन रिपीट’ अभियान तेज कर दिया है। हालांकि, संगठन द्वारा कराए गए हालिया गोपनीय सर्वे ने कई मौजूदा विधायकों की नींद उड़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के दो अलग-अलग आंतरिक सर्वे में आठ विधायक कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं, जिससे आगामी चुनाव में उनकी उम्मीदवारी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
सर्वे की रिपोर्ट:
परफॉर्मेंस में फिसड्डी साबित हुए माननीयभाजपा ने प्रदेश की सभी सीटों पर विधायकों के कामकाज, जनता के बीच उनकी छवि और वादों को पूरा करने की स्थिति का आकलन करने के लिए दो स्तरीय सर्वे कराया था। इस सर्वे की रिपोर्ट ने संगठन को चौंका दिया है:
. जनता से दूरी: सर्वे में सामने आया है कि इन आठ विधायकों की अपने क्षेत्र में सक्रियता बेहद कम है।
. अधूरे वादे: चुनाव के वक्त किए गए कई महत्वपूर्ण वादे धरातल पर अब तक पूरे नहीं हो सके हैं।
. एंटी-इंकमबेंसी का डर: भाजपा 10 साल की सत्ता के बाद किसी भी तरह की सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को पनपने नहीं देना चाहती।
संगठन सख्त:’काम करो या घर बैठो’
पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, संगठन इन आठ सीटों को लेकर बेहद गंभीर है। ये वो सीटें हैं जिन्हें भाजपा ने पिछले चुनाव में जीता था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यहां हार का खतरा नजर आ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी चुनाव में केवल ‘जिताऊ’ उम्मीदवार ही पार्टी की प्राथमिकता होंगे।
“संगठन का लक्ष्य स्पष्ट है—हर सीट पर मजबूती से चुनाव लड़ना। विधायकों को अपनी कार्यशैली सुधारने और धरातल पर सक्रियता बढ़ाने की सख्त हिदायत दी गई है।”— महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा (उत्तराखंड)
हारी हुई सीटों के लिए अलग मास्टरप्लान
भाजपा न केवल अपने मौजूदा गढ़ बचाने में जुटी है, बल्कि उन सीटों पर भी विशेष रणनीति बना रही है जहां पिछले चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था। सर्वे के जरिए इन सीटों की कमियों को गहराई से समझा गया है और वहां नए समीकरण तैयार किए जा रहे हैं।
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