शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर होगा अंतिम फैसला, सीएम सुक्खू का ऐलान

Himachal Pradesh

शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य के प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस व्यवस्था की सहानुभूतिपूर्वक समीक्षा कर रही है और शिक्षकों के सुझावों के आधार पर आवश्यक बदलाव या इसे वापस लेने पर फैसला लिया जाएगा।

रविवार को शिमला के चौड़ा मैदान में आयोजित प्राथमिक शिक्षक संघ की आमसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और शिक्षक संघ के बीच होने वाली अगली बैठक में इस मुद्दे पर निष्पक्ष और सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं और शिक्षा व्यवस्था के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करेगी।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को राहत देते हुए यह भी घोषणा की कि प्राथमिक शिक्षकों के खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई, विभागीय जांच और दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य अध्यापकों, केंद्र मुख्य अध्यापकों और खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के अधिकारों में किसी प्रकार की कटौती नहीं होगी। साथ ही प्राथमिक विद्यालयों में खेल गतिविधियों को दोबारा शुरू करने का भी ऐलान किया।

सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार जेबीटी (JBT) शिक्षकों को टीजीटी (TGT) पदों पर पदोन्नति देने की दिशा में भी कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों के साथ सचिवालय में विभिन्न मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई है। सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और प्राथमिक विद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों के साथ मिलकर काम करेगी।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई पहले ही शुरू की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि सीबीएसई पैटर्न वाले विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति लगभग पूरी हो चुकी है और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 1.36 लाख कर्मचारियों के लिए ओपीएस बहाल करने का निर्णय लिया था, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिली है। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के हितों और संसाधनों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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