चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) से जुड़े स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को डेयरी संचालन के लिए पंचायत की 500 गज तक जमीन पट्टे पर उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायती राज विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
हरियाणा पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर योजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रत्येक जिले में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) को शामिल किया गया है। संबंधित अधिकारियों को पात्र स्वयं सहायता समूहों से आवेदन प्राप्त कर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
योजना के अनुसार, केवल वही स्वयं सहायता समूह पात्र होंगे जो कम से कम एक वर्ष से सक्रिय हों, नियमित बचत और ऋण संबंधी रिकॉर्ड रखते हों तथा किसी सरकारी योजना या बैंक के साथ विवाद में शामिल न हों। समूह में कम से कम 10 सदस्य होना आवश्यक होगा और बैठकों में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी अनिवार्य होगी। साथ ही, समूह की किसी भी सदस्य के पास 500 गज या उससे अधिक निजी भूमि नहीं होनी चाहिए।
पंचायती जमीन के आवंटन के लिए स्वयं सहायता समूहों को ग्राम पंचायत, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) के पास आवेदन करना होगा। यदि एक ही जमीन के लिए एक से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो सरपंच की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति लॉटरी के माध्यम से पात्र समूह का चयन करेगी। जमीन के आवंटन से पहले ग्राम पंचायत और ग्राम सभा से निर्धारित बहुमत के साथ प्रस्ताव पारित कराना भी अनिवार्य होगा।
योजना के तहत न्यूनतम 10 पशुओं के लिए 350 गज जमीन उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि आवश्यकता के अनुसार अधिक पशु भी रखे जा सकेंगे। पट्टे की अवधि प्रारंभिक रूप से 5 वर्ष होगी, जिसे बेहतर कार्य प्रदर्शन की स्थिति में अधिकतम 8 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। लाभार्थी समूहों को प्रति वर्ष निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। वहीं, नियमों का उल्लंघन या किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर ग्राम पंचायत को बीच अवधि में भी पट्टा निरस्त करने का अधिकार होगा।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना, डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि इस योजना से महिलाओं की आय बढ़ेगी, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
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